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कलेक्टर कुणाल दुदावत की सक्रियता का दिखा असर: धान खरीदी में किसानों के खातों में पहुँचे 648 करोड़

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कोरबा | विशेष समाचार कोरबा जिले में धान खरीदी का अभियान इस बार व्यवस्था और पारदर्शिता की नई मिसाल पेश कर रहा है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के कुशल मार्गदर्शन और लगातार मैदानी दौरों का ही परिणाम है कि जिले के किसानों को धान बेचने में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। कलेक्टर की सीधी निगरानी में आबकारी, खाद्य विभाग और विपणन संघ के तालमेल से अब तक 43,566 किसानों से रिकॉर्ड 27.38 लाख क्विंटल धान खरीदी जा चुकी है।

कलेक्टर की सक्रियता: निगरानी से सुधरी व्यवस्था

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने धान खरीदी शुरू होने से पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि केंद्रों पर किसानों को लंबी कतारों और बारदाने की कमी से बचाया जाए। उनके सक्रिय प्रयासों के कारण:

  • त्वरित भुगतान: अब तक जिले के किसानों को 6,48,66,07,227.60 रुपये का भुगतान किया गया है।

  • परिवहन पर जोर: कलेक्टर के निर्देशों पर धान का उठाव (Lifting) भी युद्धस्तर पर जारी रहा जिससे केंद्रों पर भंडारण की समस्या नहीं आई।

  • मैदानी निरीक्षण: स्वयं कलेक्टर और उनकी टीम द्वारा उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण करने से बिचौलियों पर लगाम लगी और वास्तविक किसानों को लाभ मिला।

शाखावार सफलता: बरपाली और कोरबा रहे अव्वल

प्रशासनिक चुस्ती के कारण विभिन्न बैंक शाखाओं के अंतर्गत आने वाले केंद्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है:

  • बरपाली क्षेत्र: यहाँ सर्वाधिक 13,320 किसानों को 232.21 करोड़ रुपये का लाभ मिला।

  • कोरबा क्षेत्र: 9,378 किसानों के खातों में 140.48 करोड़ रुपये अंतरित किए गए।

  • पाली और कटघोरा: इन क्षेत्रों में क्रमशः 92.01 करोड़ और 85.20 करोड़ रुपये की खरीदी की गई।

उठाव की गति: 50% का आंकड़ा पार

कलेक्टर दुदावत की ‘स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन’ नीति के कारण जिले के 65 उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव तेज रहा। कुल उपार्जित धान का 51.64% (14.13 लाख क्विंटल) हिस्सा मिलों के लिए रवाना हो चुका है। लोथानी जैसे केंद्रों में तो 62.73% तक उठाव पूरा कर लिया गया है।

प्रशासन का मानवीय चेहरा

बता दे कि प्रशासन का मानवीय चेहरा तब देखने को मिला था जब कलेक्टर कुणाल दुदावत पाली विकासखंड स्थित धान उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण करने पहुँचे थे । उन्होंने वहां मौजूद किसानों से आत्मीयता के साथ छत्तीसगढ़ी में पूछा— “का हाल हे कका… कोई तकलीफ़ तो नहीं? कौन सा धान है, कितना धान है? खरीदी केंद्र में भी 10 हजार रुपये तक निकालने की सुविधा है… तत्काल आवश्यकता हो तो पैसे निकाल सकते हैं।” कलेक्टर ने स्वयं धान की नमी और गुणवत्ता की जांच की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि उपार्जन केंद्रों में केवल वास्तविक एवं पात्र किसानों से ही धान की खरीदी सुनिश्चित की जाए।

 सुशासन का मॉडल

कोरबा में धान खरीदी की यह सफलता दिखाती है कि यदि प्रशासनिक नेतृत्व संवेदनशील और सक्रिय हो, तो सरकारी योजनाएं ज़मीनी स्तर पर बिना किसी बाधा के सफल होती हैं। कलेक्टर कुणाल दुदावत के नेतृत्व में कोरबा जिला इस बार धान खरीदी और उठाव प्रबंधन में प्रदेश के सर्वोत्तम जिलों में शुमार हो गया है।

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