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साधारण ‘प्रवर्तन इकाई’ से ‘सुपरपावर’ बनने तक… क्या है ED का इतिहास और PMLA की असली ताकत?

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Enforcement directorate : हाल के वर्षों में ‘प्रवर्तन निदेशालय’ (ED) भारत की सबसे चर्चित और शक्तिशाली जांच एजेंसी बनकर उभरी है। विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई हो या बड़े आर्थिक घोटाले, ED का नाम हर जगह सुर्खियों में रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1956 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब इसे ‘ब्रह्मास्त्र’ रखने वाली एजेंसी के रूप में नहीं देखा जाता था?

स्थापना: विदेशी मुद्रा की निगरानी से हुई शुरुआत

ED का गठन 1 मई, 1956 को वित्त मंत्रालय के तहत किया गया था। शुरुआती दौर में इसे मात्र ‘प्रवर्तन इकाई’ (Enforcement Unit) कहा जाता था। 1957 में इसका नाम बदलकर प्रवर्तन निदेशालय किया गया। उस समय इसका प्राथमिक उद्देश्य ‘FERA-1947’ कानून के तहत विदेशी मुद्रा के अवैध लेनदेन को रोकना था, ताकि देश की आर्थिक स्थिरता बनी रहे।

PMLA: वह ‘ब्रह्मास्त्र’ जिसने बदल दी ED की तस्वीर

ED की असली ताकत 2002 में तब बढ़ी जब ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (PMLA) पारित किया गया। इस कानून ने एजेंसी को कुछ ऐसी शक्तियां दीं जो इसे CBI और सामान्य पुलिस से कहीं अधिक खतरनाक बनाती हैं:

  • बयान ही सबूत: PMLA की धारा 50 के तहत ED के सामने दिया गया आरोपी का बयान कोर्ट में सबूत माना जाता है। (पुलिस के मामले में ऐसा नहीं होता)।

  • संपत्ति कुर्की का अधिकार: अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) के संदेह मात्र पर ED जांच के दौरान ही संपत्ति जब्त कर सकती है। इसके लिए दोष सिद्ध होने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।

  • जमानत की कठिन शर्तें: PMLA में जमानत मिलना बेहद मुश्किल है। कोर्ट को यह विश्वास होना चाहिए कि आरोपी निर्दोष है, जो शुरुआती दौर में साबित करना लगभग नामुमकिन होता है।

  • सबूत का बोझ: सामान्य कानून में पुलिस को दोष साबित करना होता है, लेकिन यहाँ आरोपी को साबित करना पड़ता है कि उसकी संपत्ति ‘व्हाइट मनी’ है।

CBI से कितनी अलग और घातक है ED

जहाँ CBI किसी अपराध या भ्रष्टाचार की जांच करती है, वहीं ED उस भ्रष्टाचार से पैदा हुए ‘मनी ट्रेल’ (पैसे के लेन-देन का रास्ता) की जांच करती है। ED सीधे FIR दर्ज नहीं करती, बल्कि पुलिस या CBI द्वारा दर्ज मामलों के आधार पर अपनी रिपोर्ट (ECIR) तैयार करती है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

विस्तार और नए कानून

1960 में प्रशासनिक नियंत्रण राजस्व विभाग के पास आने के बाद ED का जाल मुंबई और कोलकाता से निकलकर देशभर में फैल गया। 2018 में ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम’ (FEOA) आने के बाद से ED को देश छोड़कर भागने वाले अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की और भी व्यापक शक्तियां मिल गई हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

मौजूदा सियासी हलचल

वर्तमान में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले से लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ी कानूनी लड़ाइयों तक, ED की सक्रियता चरम पर है। ममता बनर्जी से जुड़े ताजा मामले में फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को लेकर जारी खींचतान अब कलकत्ता हाई कोर्ट की चौखट पर है, जो आने वाले समय में उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।