Latest News
रायपुर में सजेगा आईपीएल का रोमांच: RCB ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपी टीम की जर्सी, दिया मैच का आमंत्रण छत्तीसगढ़: वन विश्राम गृहों में अब अश्लीलता और अनधिकृत प्रवेश पर लगेगी लगाम, चप्पे-चप्पे पर होगी सीसीटीवी से नजर सिस्टम की बेरुखी या किसान की बेबसी? 24 घंटे में दूसरे किसान ने पिया जहर; कोरबा में धान खरीदी का संकट गहराया सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: कुत्ता काटने पर राज्य सरकार देगी मुआवजा, आवारा कुत्तों पर दिखाई सख्त रुख मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री की अपील: ‘चीनी मांझा’ का उपयोग पड़ेगा भारी, होगी कड़ी कार्रवाई कोरबा में क्रिकेट का महाकुंभ: ‘मीना जैन मेमोरियल कप’ के सीजन-1 का भव्य समापन, शेरा 11 बनी ओपन चैंपियन
Home » कोरबा » पुटी पखना में गोंगपा की हुंकार: विधायक तुलेश्वर मरकाम बोले— ‘हमारी जमीन, हमारा कोयला, ग्रामीणों का होगा फैसला’

पुटी पखना में गोंगपा की हुंकार: विधायक तुलेश्वर मरकाम बोले— ‘हमारी जमीन, हमारा कोयला, ग्रामीणों का होगा फैसला’

Share:

कोरबा | 10 जनवरी जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड स्थित ग्राम पुटी पखना में शनिवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के नेतृत्व में जन-आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा। पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम की अगुवाई में आयोजित इस विशाल ‘महापंचायत एवं जन आंदोलन’ में हजारों आदिवासियों ने एक सुर में रूंगटा कोल माइंस के विस्तार का विरोध किया और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प लिया।

खदान विस्तार के खिलाफ आर-पार की जंग

आंदोलन को संबोधित करते हुए विधायक तुलेश्वर मरकाम ने शासन-प्रशासन और निजी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्र की चार से अधिक ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है ताकि खदान विस्तार के लिए जबरन प्रस्ताव पारित कराए जा सकें।

विधायक ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी:

“जो भी ग्राम पंचायत ग्रामीणों की इच्छा के विरुद्ध खदान के पक्ष में प्रस्ताव पारित करेगी, उस पंचायत प्रतिनिधि के खिलाफ जनता के सहयोग से अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा।”

पर्यावरण और अस्तित्व पर मंडराता खतरा

महापंचायत में ग्रामीणों ने विस्तार को विनाशकारी बताया। विधायक मरकाम ने तर्क दिया कि क्षेत्र में पहले से संचालित दो कोयला खदानों ने पहले ही प्राकृतिक जल स्रोतों और जंगलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। एक और नई खदान आदिवासी समाज के अस्तित्व को मिटाने का काम करेगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जमीन के असली मालिक ग्रामीण हैं और भूमि अधिग्रहण उनकी सहमति के बिना संभव नहीं है।

प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति

आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित रहीं:

  • वन अधिकार पट्टा: व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार पट्टों का तत्काल वितरण।

  • प्रस्ताव निरस्तीकरण: दबाव में लिए जा रहे ग्राम पंचायत के प्रस्तावों पर रोक।

  • आजीविका सुरक्षा: खेती और जंगल पर आधारित आदिवासी संस्कृति का संरक्षण।

इस महापंचायत ने क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मी बढ़ा दी है। आदिवासियों के इस उग्र रुख ने साफ कर दिया है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखली बर्दाश्त नहीं करेंगे।

Leave a Comment