नई दिल्ली | केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बिलेटेड और संशोधित इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की है। आयकर विभाग उन करदाताओं को ईमेल और एसएमएस के माध्यम से लगातार सूचित कर रहा है, जिन्होंने अपने रिफंड दावों में गलत जानकारी दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि करदाता इस समय सीमा का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें न केवल पेनाल्टी भरनी होगी, बल्कि कई महत्वपूर्ण लाभों से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
डेडलाइन चूकी तो क्या होगा?
31 दिसंबर 2025 के बाद करदाता अपना रिटर्न रिवाइज (संशोधित) नहीं कर पाएंगे। इसके साथ ही बिलेटेड रिटर्न (देरी से भरा जाने वाला रिटर्न) फाइल करने का विकल्प भी खत्म हो जाएगा। समय सीमा समाप्त होने के बाद होने वाले नुकसान इस प्रकार हैं:
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पेनाल्टी और ब्याज: देरी से रिटर्न फाइल करने पर भारी जुर्माना और बकाया टैक्स पर ब्याज देना होगा।
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रिफंड का नुकसान: तय तारीख के बाद सुधार न करने पर गलतियों के कारण रिफंड रुक सकता है।
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घाटे का समायोजन (Loss Carry Forward): करदाता अपने बिजनेस या कैपिटल लॉस को अगले वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे।
अंतिम विकल्प: अपडेटेड रिटर्न (ITR-U)
यदि आप 31 दिसंबर की डेडलाइन चूक जाते हैं, तो आपके पास ITR-U भरने का विकल्प रहता है। इसे असेसमेंट ईयर खत्म होने के 24 से 48 महीनों के भीतर भरा जा सकता है, लेकिन यह महंगा सौदा साबित होता है:
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अतिरिक्त टैक्स: यदि 31 दिसंबर 2026 तक रिटर्न भरते हैं, तो 25% अतिरिक्त टैक्स देना होगा।
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भारी जुर्माना: 24 महीने के बाद यह जुर्माना बढ़कर 50% अतिरिक्त टैक्स हो जाता है।
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कोई रिफंड नहीं: ITR-U के माध्यम से आप किसी भी टैक्स रिफंड का दावा नहीं कर सकते।
माफी की अर्जी: एक कठिन रास्ता
विशेष परिस्थितियों में, यदि करदाता माफी के लिए आवेदन करता है और विभाग उसे स्वीकार कर लेता है, तो ही देरी से रिवाइज्ड रिटर्न की अनुमति मिलती है। हालांकि, विभाग द्वारा ऐसी मंजूरियां बहुत ही दुर्लभ मामलों में दी जाती हैं।
सलाह: आयकर विभाग की ओर से प्राप्त संदेशों को नजरअंदाज न करें। किसी भी त्रुटि या लंबित रिटर्न को 31 दिसंबर तक सुधार लें ताकि भविष्य की कानूनी पेचीदगियों और वित्तीय नुकसान से बचा जा सके।








