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कोरबा में चरमराई यातायात व्यवस्था: पुराने पुल बंद, बैकअप प्लान नदारद; 4 लाख आबादी और इंडस्ट्री पर संकट!

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लापरवाही की भारी कीमत: कुदुरमाल और बेलगिरी पुल जर्जर, 400 गुना बढ़े ट्रैफिक के आगे सिस्टम फेल

कोरबा छत्तीसगढ़, 6 दिसंबर। आकांक्षी जिला कोरबा में अधिकारियों की अदूरदर्शिता, अनदेखी और अव्यवस्थित प्लानिंग ने यातायात व्यवस्था को पंगु बना दिया है। औद्योगिक विकास के कारण पिछले ढाई दशक में यातायात का दबाव लगभग 400 गुना बढ़ चुका है, जिसमें रोजाना 4,000 से अधिक भारी वाहन कोयला परिवहन करते हैं, बावजूद इसके पुलों की क्षमता बढ़ाने या नए पुल बनाने पर संबंधित विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया।

प्रमुख संकट बिंदु:

  • कुदुरमाल पुल बंद: हसदेव नदी पर बना 650 मीटर पुराना कुदुरमाल पुल जर्जर हालत और स्लैब बैठने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर बंद कर दिया गया है। बैकअप (समानांतर) पुल तैयार नहीं होने के कारण, कोरबा, बिलासपुर, रायगढ़ और जशपुर जाने वालों को लगभग 50 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे जनता और ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान हो रहा है।

  • बेलगिरी नाले का पुल भी खतरे में: बालको क्षेत्र के बेलगिरी नाले पर बना पुल भी चौबीसों घंटे भारी वाहनों के दबाव के कारण गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसे भी जल्द बंद करने की तैयारी चल रही है।

  • बदइंतजामी से फासला बढ़ा: विभागीय बदइंतजामी ने जनता के आवागमन का फासला बढ़ा दिया है। यदि बेलगिरी पुल भी बंद होता है, तो जिले की 4 लाख से अधिक आबादी और औद्योगिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह प्रभावित होगी।

फंड की कमी का रोना

लगभग 40 साल पुराने इन पुलों की मरम्मत के अभाव में यह स्थिति बनी है। कुछ वर्ष पहले तीन नए पुलों (भिलाईखुर्द-सर्वमंगला, बालको-रिसदी रोड, परसाभाटा-ध्यानचंद चौक) के निर्माण के लिए करीब 66 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन फंड स्वीकृत नहीं हुआ। संबंधित विभाग अब भी फंड की कमी का हवाला दे रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जिले को हर साल लगभग 800 करोड़ रुपये डीएमएफ फंड मिलता है। यदि इस राशि का सही उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाता, तो पुलों की बदहाली दूर की जा सकती थी, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण जनता को यह बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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