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फुटबॉल का असली GOAT कौन? पेले, माराडोना और रोनाल्डो के दौर में क्यों सबसे जुदा हैं ‘जादूगर’ लियोनेल मेसी

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खेल जगत 18 जून : फुटबॉल की दुनिया का असली ‘GOAT’ (Greatest of All Time) यानी सर्वकालिक महान खिलाड़ी कौन है? यह एक ऐसी अंतहीन बहस है जो दुनिया के किसी भी कोने में चाय-कॉफी की चुस्कियों और समोसे-पिज्ज़ा की प्लेट के साथ शुरू हो जाए, तो सदियों तक चलती रहेगी।

हर दौर के अपने सूरमा रहे हैं। एक थे पेले, जिन्होंने तीन-तीन वर्ल्ड कप जीतकर और अपने जादुई खेल से खुद को फुटबॉल का उस्ताद साबित किया। फिर डिएगो माराडोना आए, जिन्होंने 1986 में अकेले अपने दम पर अर्जेंटीना को फुटबॉल का ताज पहना दिया। आधुनिक दौर में क्रिस्टियानो रोनाल्डो आए—जिम में तराशा हुआ फौलादी बदन, गगनचुंबी जंप और गोल दागने की एक बेरहम मशीन।

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लेकिन इन सबके बीच जब लियोनेल मेसी मैदान पर उतरते हैं, तो वह इस पूरी बहस को ही डिलीट कर देते हैं। उन्हें खेलते देखना एक अलग ही नशा है। जिसे देखकर अक्सर फैंस के मन में आता है कि भाई, ये हाड़-मांस का इंसान है या भगवान ने इसे धरती पर फुटबॉल की जॉयस्टिक देकर भेजा है कि—‘जा बेटा, जी भर के खेल!’

बीमारी से बार्सिलोना के किंग बनने तक का सफर

मेसी की कहानी किसी परियों की कहानी जैसी है, जो किसी हिंदी फिल्म के हीरो की ज़िंदगी की तरह बेहद कठिन संघर्षों से गुज़री है। अर्जेंटीना के एक छोटे से शहर रोसारियो में जन्मे इस लड़के को बचपन में ‘ग्रोथ हार्मोन डेफिसिएंसी’ नाम की गंभीर बीमारी थी। इस बीमारी के कारण उनके पैर छोटे रह गए थे और गरीब परिवार के पास इलाज के महंगे पैसे नहीं थे।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। स्पेन के मशहूर फुटबॉल क्लब बार्सिलोना ने इस छोटे कद के लड़के में छुपी असाधारण प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने न सिर्फ मेसी के इलाज का पूरा खर्च उठाया, बल्कि उसे अपनी मशहूर ‘ला मासिया’ (La Masia) एकेडमी में शामिल किया। इसके बाद मेसी ने जो इतिहास लिखा, उसे पूरी दुनिया जानती है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 और ‘मेसी का मैजिक’

मेसी भले ही अर्जेंटीना के कप्तान हैं, लेकिन उनके चाहने वाले सरहदों से परे पूरी दुनिया में मौजूद हैं। जारी फीफा विश्व कप 2026 में भी मेसी का वही पुराना जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। अल्जीरिया के खिलाफ एक मुकाबले में हैट्रिक ठोककर उन्होंने वर्ल्ड कप इतिहास में अपने 16 गोल पूरे कर लिए हैं।

इस गोल के साथ ही उन्होंने जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाभ क्लोज के सबसे ज़्यादा वर्ल्ड कप गोल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली है। अपने छठे वर्ल्ड कप और करियर के 200वें इंटरनेशनल मैच में खेल रहे इस जादुई खिलाड़ी के पीछे रिकॉर्ड्स खुद हाथ धोकर भाग रहे हैं।

रोनाल्डो बनाम मेसी: मशीन और मैजिशियन का फर्क

अक्सर लोग क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी की तुलना करते हैं, लेकिन दोनों की शैली में एक बुनियादी अंतर है:

  • क्रिस्टियानो रोनाल्डो: रोनाल्डो कमाल के खिलाड़ी और पेनाल्टी बॉक्स के असली शहंशाह हैं। उनका अपना एक अलग स्वैग है। उन्हें बॉल दो, वो उसे गोल पोस्ट के जाल में दे मारेंगे और काम खत्म।

  • लियोनेल मेसी: मेसी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि पूरा फुटबॉल इंस्टीट्यूट हैं। वे मैदान पर खुद ही स्क्रिप्ट लिखते हैं, खुद ही डायरेक्ट करते हैं और क्लाइमेक्स में हीरो बनकर गोल भी खुद ही दाग देते हैं।

मेसी को गोल करने के लिए किसी सॉलिड सपोर्ट या जादुई पास की ज़रूरत नहीं होती। मिडफील्ड में काफी पीछे से आना, विपक्षी खिलाड़ी से बॉल छीनना, मूव्स बनाना और फिर पूरे डिफेंस को चीरते हुए गोल पोस्ट में घुस जाना—यही तो है मेसी का मैजिक। आंकड़े गवाह हैं कि मेसी के नाम 800 से ज्यादा गोल तो हैं ही, लेकिन फुटबॉल इतिहास में सबसे ज्यादा ‘असिस्ट’ (दूसरों से गोल करवाना) भी उन्हीं के नाम दर्ज है। यानी यह बंदा सिर्फ खुद लाइमलाइट नहीं लूटता, बल्कि अपनी टीम को भी चमकाता है।

पेलेमाराडोना के क्लासिक दौर से भी आगे

पुराने ज़माने के फैंस अक्सर पेले और माराडोना का रोब झाड़ते हैं। लेकिन हमें यह मानना होगा कि आज का मॉडर्न फुटबॉल बहुत बेरहम, तेज और गलाकाट हो चुका है। आज मैदान पर सांस लेने की फुर्सत नहीं मिलती; फिटनेस, स्पीड और माइंड गेम सब 10 गुना मुश्किल हो चुके हैं।

इसी मुश्किल दौर में मेसी पर सालों तक यह ताना मारा गया कि ‘यह सिर्फ बार्सिलोना का शेर है, अर्जेंटीना के लिए ढेर है।’ लेकिन इस शेर ने अपनी खामोशी और खेल से सबका मुंह बंद कर दिया।

  1. पहले 2021 में कट्टर प्रतिद्वंदी ब्राजील को हराकर कोपा अमेरिका जीता।

  2. फिर आया 2022 का वो यादगार कतर वर्ल्ड कप, जहां 35 साल की उम्र में मेसी ने हर नॉकआउट मैच में गोल दागा, फाइनल के थ्रिलर में दो गोल किए और अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाकर ही दम लिया।

सादगी और ‘नो-ड्रामा एटीट्यूड’

जो चीज़ मेसी को सबसे महान बनाती है, वो है उनकी सादगी। जहां मॉडर्न फुटबॉल के कई दिग्गजों में ‘I, Me, Myself’ वाला ईगो दिखता है, वहीं मेसी अपनी टीम में एकदम डाउन-टू-अर्थ रहते हैं। मैदान पर पेनाल्टी मारनी हो, तो वे मुस्कुराकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे देते हैं ताकि उसका कॉन्फिडेंस बढ़ सके।

अंतिम निष्कर्ष: जिसके पास 8 बैलॉन डी’ओर (Ballon d’Or) हों, देश के लिए कोपा अमेरिका और हाथ में चमचमाता वर्ल्ड कप हो, क्लब फुटबॉल की हर एक ट्रॉफी हो, उसे अब खुद को साबित करने के लिए और क्या चाहिए?

पेले अपने दौर के बेताज बादशाह थे, माराडोना अर्जेंटीना की रूह थे और रोनाल्डो मॉडर्न फिटनेस के अल्टीमेट पोस्टर बॉय हैं। लेकिन मेसी इन सबका एक सुपर-रिफाइंड निचोड़ हैं। लगातार 20 साल तक फुटबॉल की सल्तनत पर राज करना कोई तुक्का नहीं हो सकता। आने वाली पीढ़ियां जब इस दौर के फुटबॉल को याद करेंगी, तो गर्व से कहेंगी कि—“हमने मेसी को लाइव खेलते देखा है।”

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