अयोध्या 17 जून : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़े कथित विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस पूरे मामले के केंद्र में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बेहद करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव पर मंदिर के चढ़ावे और प्रबंधन में भारी हेरफेर के आरोप लग रहे हैं।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) ने टिन्नू यादव समेत 6 सेवादारों को नोटिस जारी कर लंबी पूछताछ की है। आइए जानते हैं कि अयोध्या की गलियों में टेम्पो चलाने वाला एक साधारण युवक कैसे अचानक करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा।
फर्श से अर्श तक: चाय की दुकान से कारसेवकपुरम का सफर
अयोध्या के स्वर्गद्वार इलाके के रहने वाले टिन्नू यादव की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है। टिन्नू एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है, जिसके पिता तुलसीराम यादव कभी नया घाट पर चाय की छोटी सी दुकान चलाते थे।
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1994-95 (टेम्पो चालक): टिन्नू अपना गुजारा करने के लिए अयोध्या की सड़कों पर ऑटो और टेम्पो चलाया करता था।
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महेश नारायण से मुलाकात: इसी दौरान उसकी मुलाकात श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के तत्कालीन मंत्री महेश नारायण से हुई। टिन्नू की वफादारी देखकर उन्होंने उसे अपना निजी ड्राइवर रख लिया।
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VHP और RSS में एंट्री: ड्राइवर बनने के बाद टिन्नू का कारसेवकपुरम में आना-जाना शुरू हुआ, जिससे संघ और विश्व हिंदू परिषद के बड़े नेताओं से उसकी नजदीकियां बढ़ने लगीं।
कैसे बने चंपत राय के ‘राइट हैंड’?
साल 1991 में जब चंपत राय क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनकर अयोध्या आए, तब संगठन में उनका प्रभाव बढ़ रहा था। साल 1998 में टिन्नू की मुलाकात सीधे चंपत राय से हुई।
मई 2022 में महेश नारायण के निधन के बाद चंपत राय ने टिन्नू को अपना पूरा संरक्षण दे दिया। उसे कारसेवकपुरम में गाड़ियों और रसद (राशन-सामग्री) प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने और राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के बाद, टिन्नू यादव को राम मंदिर ट्रस्ट में एक आधिकारिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कर लिया गया।
चंद हजार की सैलरी, लेकिन संपत्तियों का साम्राज्य!
सोशल मीडिया के दावों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट से महज कुछ हजार रुपये महीना वेतन पाने वाले टिन्नू यादव की आर्थिक स्थिति पिछले 4-5 सालों में रॉकेट की रफ्तार से बदली है। उस पर बड़े पैमाने पर बेनामी संपत्ति बनाने के आरोप हैं:
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आलीशान हॉस्टल्स: अयोध्या के नाका और एयरपोर्ट रोड पर एक 24 कमरों का दो मंजिला आलीशान हॉस्टल। इसके अलावा निषाद राज चौराहे के पास भी एक बड़ा हॉस्टल संचालित है।
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रेस्टोरेंट्स में हिस्सेदारी: अयोध्या शहर के करीब 6 बड़े और नामी रेस्टोरेंट्स में टिन्नू की कमर्शियल पार्टनरशिप होने का दावा।
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जमीन और गाड़ियां: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले (विक्रमजोत क्षेत्र) में लगभग 20 से 22 बीघा कृषि भूमि और लखनऊ में एक निजी आवास। साथ ही स्कोडा और स्कॉर्पियो जैसी महंगी गाड़ियों का काफिला।
“50 करोड़ की संपत्ति साबित करो, 45 करोड़ दान कर दूंगी” — परिवार की सफाई
इस पूरे चंदा घोटाले और विवाद पर टिन्नू यादव के परिवार ने पलटवार किया है। टिन्नू की पत्नी ने विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर लग रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक खुली चुनौती दी है।
“यदि कोई हमारी 50 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति को साबित कर दे, तो हम उसमें से 45 करोड़ रुपये तुरंत दान करने के लिए तैयार हैं। यह सब हमें बदनाम करने की साजिश है।” — टिन्नू यादव की पत्नी
फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसआईटी (SIT) की जांच की आंच कारसेवकपुरम तक पहुंच चुकी है। देखना दिलचस्प होगा कि जांच में क्या सच सामने आता हैं।
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