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Shivsena UBT Crisis: उद्धव गुट में फिर बड़ी बगावत की आहट! सांसदों को व्हिप जारी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखा पत्र

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नई दिल्ली / मुंबई 17 जून : महाराष्ट्र की राजनीति से एक बार फिर बड़ी खबर आ रही है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में एक बार फिर ठीक 2022 जैसी बगावत की सुगबुगाहट तेज हो गई है।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) चर्चा है कि पार्टी के कई सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं। इन अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने बेहद आक्रामक और रणनीतिक कदम उठाया है।

पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के निर्देश पर सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र भेजा है।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इस पत्र के जरिए पार्टी ने कुछ सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता देने या किसी अन्य दल में उनके विलय की संभावनाओं पर कड़ी कानूनी आपत्ति दर्ज कराई है।

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स्पीकर को लिखे पत्र में क्या है? (संवैधानिक और कानूनी दलीलें)

सांसद अरविंद सावंत ने अपने पत्र में साफ किया है कि ‘असली शिवसेना’ का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए स्पीकर से अपील की है कि किसी भी बागी गुट के दावों को स्वीकार न किया जाए। पत्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • अलग गुट को न मिले मान्यता: मीडिया में खबरें हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर जीते कुछ सांसद लोकसभा के भीतर एक अलग समूह बनाने या किसी अन्य दल में विलय के लिए स्पीकर कार्यालय से संपर्क साध रहे हैं। पार्टी ने मांग की है कि ऐसे किसी भी प्रयास को स्वीकार न किया जाए।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज).

  • पार्टी की सर्वोच्चता: संसदीय दल का वजूद राजनीतिक दल से ही होता है। कानूनन, संसद के भीतर एक ही अधिकृत पार्टी नेतृत्व, एक ही मान्यता प्राप्त व्हिप और एक ही पार्टी संरचना हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला

अरविंद सावंत ने देश के सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा ‘सुभाष देसाई बनाम महाराष्ट्र के राज्यपाल’ मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि:

“91वें संविधान संशोधन (2003) के तहत दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के पैरा 3 को हटा दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब कोई भी सदस्य अयोग्यता से बचने के लिए ‘पार्टी में विभाजन’ का बहाना नहीं बना सकता। कानूनन, पार्टी से अलग होकर बनाया गया कोई भी गुट वैध नहीं है।”

उद्धव ठाकरे का ‘व्हिप’ चक्रव्यूह: अनुपस्थित रहने पर होगी कार्रवाई

एक तरफ जहां कानूनी मोर्चा संभाला गया है, वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में होने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक के लिए अपने सभी सांसदों को ‘व्हिप’ (Whip) जारी कर दिया है।

  • सूत्रों का दावा: इस बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों के खिलाफ पार्टी तुरंत अयोग्यता (Disqualification) की कार्यवाही शुरू कर सकती है।

  • 2022 की यादें ताजा: पार्टी ने ठीक ऐसा ही कदम साल 2022 में उठाया था, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत की थी।

क्या है बगावत का पूरा गणित?

राजनीतिक गलियारों और सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) इस समय गंभीर आंतरिक संकट से जूझ रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से ‘6 से 7’ सांसद  एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ शिवसेना के संपर्क में हैं और वे फिलहाल देश की राजधानी दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इसी संभावित टूट को रोकने के लिए उद्धव कैंप ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

खबर के मुख्य बिंदु 

  • बड़ा संकट: उद्धव गुट के 9 में से 6-7 सांसदों के पाला बदलने की अटकलें तेज।

  • एक्शन में उद्धव: दिल्ली की बैठक के लिए सभी सांसदों को व्हिप जारी, अयोग्यता की चेतावनी।

  • स्पीकर को पत्र: अरविंद सावंत ने ओम बिरला से कहा— बिना हमारा पक्ष सुने बागी सांसदों को अलग गुट की मान्यता न दी जाए।

  • कानूनी आधार: दलबदल विरोधी कानून और सुप्रीम कोर्ट के ‘सुभाष देसाई मामले’ के फैसले का दिया गया हवाला।

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