प्रयागराज 4 जून । रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक रूह कंपा देने वाली घटना में, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (साउथ मलाका) में हुए चौहरे हत्याकांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जो सच सामने आया है, उसने हर किसी के दिल को झकझोर कर रख दिया है। अपने ही खून ने दौलत की हवस में माता-पिता और बहन की बेरहमी से हत्या कर दी, लेकिन कुदरत का इंसाफ देखिए—साजिशकर्ता बेटा खुद भी अपने दोस्त के लालच का शिकार हो गया और अपनी जान गंवा बैठा।
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कर्ज और लालच ने बनाया हैवान: ऐसे रची गई खूनी साजिश
पुलिस जानकारी के अनुसार वीरेंद्र वैश्य का छोटा बेटा अभिषेक कर्ज के दलदल में डूबा हुआ था। ऊपर से माता-पिता उसे जायदाद से बेदखल करने की तैयारी कर रहे थे। इसी रंजिश और जेवरात हड़पने की हवस में अभिषेक ने अपने दोस्त सनी गुप्ता के साथ मिलकर पूरे परिवार को खत्म करने का खौफनाक प्लान बनाया।
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पहला वार: अभिषेक और सनी ने सबसे पहले घर के मुखिया वीरेंद्र वैश्य के सिर पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतारा।
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ममता का कत्ल: इसके बाद चीख-पुकार सुनकर आई मां अनीता को बेरहमी से मार डाला।
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दौड़ती बहन की हत्या: सीढ़ियों से भागकर जान बचाने की कोशिश कर रही बहन मीनाक्षी को भी आरोपियों ने नहीं बख्शा और तड़पा-तड़पा कर मार दिया।
‘जो अपने मां-बाप का न हुआ, वो मेरा क्या होगा…’ और ढेर हो गया मुख्य साजिशकर्ता
तीनों अपनों की लाशें बिछाने के बाद अभिषेक और सनी नीचे दुकान में आए। वहां करीब एक किलो सोने-चांदी के जेवरात का बंटवारा होने लगा। इसी बीच हिस्सेदारी को लेकर दोनों में बहस हो गई।
तभी सनी के मन में ख्याल आया, “जो बेटा अपने सगे मां-बाप और बहन का नहीं हुआ, वो कल को मेरा क्या होगा? यह मुझे भी धोखा दे देगा।” इसी शक और लालच में सनी ने उसी लोहे की रॉड से अभिषेक के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे अभिषेक की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस को गुमराह करने का ड्रामा और रातभर लाशों के बीच पहरा
चारों हत्याओं को अंजाम देने के बाद आरोपी सनी पूरी रात उसी खून से सने घर में रुका रहा।
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उसने सबसे पहले फर्श पर फैले खून को साफ किया।
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साक्ष्यों को मिटाने के लिए शवों को कपड़ों और गद्दों में लपेटकर पूरे घर को धो डाला।
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झूठी साजिश: पुलिस को भटकाने के लिए अभिषेक ने मरने से पहले ही एक गत्ते (दफ्ती) पर लिख दिया था—‘बंटी, बबली, बहू ने मारा’ ताकि शक जेल में बंद उसके भाई और भाभी पर जाए।
तीसरी आंख (CCTV) और कॉल डिटेल ने खोला राज
प्रयागराज पुलिस ने जब घटनास्थल की बारीकी से जांच की, तो कड़ियां जुड़ती गईं। इलाके के CCTV फुटेज और अभिषेक के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने पर सनी गुप्ता का नाम सामने आया। पुलिस ने जब सनी को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया और उसने रोते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने सनी की दुकान से करोड़ों रुपये के जेवरात बरामद कर उसे जेल भेज दिया है।
लापरवाही पर एक्शन: इस मामले में ढिलाई बरतने के आरोप में पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने दो सब-इंस्पेक्टर्स (SI) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। वहीं, केस को सुलझाने में एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा, DCP सिटी मनीष शांडिल्य और ACP रवि गुप्ता की टीम ने दिन-रात एक कर दिया।
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