कोरबा, 06 मई। जिले के ग्राम लोतलोता में राखड़ (फ्लाई ऐश) डंपिंग को लेकर स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (कोरबा-पश्चिम) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। पूर्व सरपंच केशर प्रसाद भारिया के नेतृत्व में कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जो राखड़ बांध सालों पहले बंद हो चुका था, उसमें नियमों के विरुद्ध दोबारा डंपिंग की जा रही है।

क्षमताओं का उल्लंघन और अवैध डंपिंग
ग्रामीणों का कहना है कि लोतलोता स्थित राखड़ बांध 4-5 साल पहले ही अपनी पूरी क्षमता भर जाने के कारण बंद कर दिया गया था। लेकिन वर्तमान में ग्राम झाबू के राखड़ बांध से राखड़ लाकर यहाँ खाली स्थानों पर खपाया जा रहा है। अधिकारियों और ठेकेदारों की इस मिलीभगत ने पूरे गांव को धूल के गुबार में झोंक दिया है।
हवा चली नहीं कि मुसीबत बढ़ी
गांव के हालात इतने बदतर हो गए हैं कि:
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प्रदूषण की मार: हल्की सी हवा चलने पर पूरा गांव राखड़ की चादर से ढक जाता है।
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भोजन में राखड़: ग्रामीणों ने शिकायत की है कि शादी-ब्याह जैसे शुभ आयोजनों में परोसे जाने वाले भोजन में राखड़ गिर रही है, जिससे मेहमानों के सामने शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है।
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खेती पर खतरा: आने वाले मानसून में यह राखड़ खेतों में फैल जाएगी, जिससे फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने का डर बना हुआ है।
जांच और कार्रवाई की मांग
पूर्व सरपंच ने वीडियो साक्ष्य साझा करते हुए कहा कि प्रशासन की लापरवाही के कारण पूरा लोतलोता पंचायत राखड़ से बुरी तरह प्रभावित है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच की जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई कर डंपिंग को तुरंत रोका जाए।
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