Trump Vs Iran :अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए ईरान के शांति प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का रुख स्पष्ट है—ईरान को पहले अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगानी होगी, तभी किसी प्रकार की आर्थिक राहत दी जाएगी। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
प्रमुख बिंदु और ट्रंप का कड़ा रुख
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प्रस्ताव को किया खारिज: ईरान ने शर्त रखी थी कि यदि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से नाकेबंदी हटाता है, तो वे परमाणु समझौते पर बात करेंगे। ट्रंप ने इसे अपर्याप्त बताते हुए कहा कि मौजूदा शर्तों पर समझौता नामुमकिन है।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
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सुरक्षा की चिंता: ट्रंप ने परमाणु हथियारों के खतरे को लेकर चेतावनी दी। उनका मानना है कि यदि ईरान परमाणु बम बनाता है, तो उसका पहला निशाना इजरायल होगा, जिसके बाद यूरोप और अंततः अमेरिका पर हमला होगा। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को ‘पागल’ (Lunatics) संबोधित करते हुए कहा कि उनके हाथ में विनाशकारी हथियार नहीं छोड़े जा सकते।
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सैन्य शक्ति का प्रदर्शन: ट्रंप ने दावा किया कि B-2 बॉम्बर्स की कार्रवाई से ईरान की नौसेना और रडार सिस्टम काफी कमजोर हो चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे पूर्ण युद्ध के बजाय कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, लेकिन वह समाधान अमेरिका की शर्तों पर ही होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और वैश्विक संकट
यह जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति इसी संकरे रास्ते से होती है।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
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आर्थिक मंदी का डर: नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
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वैश्विक दबाव: यूरोपीय संघ और अन्य पड़ोसी देश इस रास्ते को खुलवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि वैश्विक मंदी के खतरे को टाला जा सके।
ईरान की जवाबी तैयारी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने कहा है कि जब तक अमेरिका धमकी वाली भाषा बंद नहीं करता, बातचीत संभव नहीं है। ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को अलर्ट पर रखा है और तुर्की, सऊदी अरब तथा मिस्र जैसे देशों से संपर्क साधा है।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारी और इजरायल एक ‘छोटे लेकिन तीव्र’ सैन्य हमले की योजना पर विचार कर रहे हैं, जिससे ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
निष्कर्ष
फिलहाल स्थिति ‘डेडलॉक’ पर है। एक तरफ अमेरिका का भारी दबाव है, तो दूसरी तरफ ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं। यदि कूटनीति विफल रहती है, तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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