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कोरबा राखड़ डैम हादसा: अधिकारियों की VIP मौजूदगी में ‘जलसमाधि’, यह चूक है या सोची-समझी लापरवाही?

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कोरबा 19 अप्रैल 2026। औद्योगिक नगरी कोरबा एक बार फिर राख के सैलाब और प्रबंधन की संवेदनहीनता से दहल उठी है। हसदेव ताप विद्युत गृह (HTPP) के झाबू राखड़ डैम का फूटना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का वह जीता-जागता प्रमाण है जिसने एक निर्दोष जेसीबी ऑपरेटर की बलि ले ली।

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तमाशबीन बना रहा प्रबंधन, ऑपरेटर ने गंवाई जान

सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जब यह दीवार टूटी, तब चीफ इंजीनियर देवनाथ खुद वहां निरीक्षण कर रहे थे। उनके साथ ईई चंचल ध्रुव और एई चंद्रहास साहू जैसे जिम्मेदार अधिकारी भी मौजूद थे। सवाल यह उठता है कि क्या इन ‘विशेषज्ञों’ को आने वाले खतरे का अंदाजा नहीं था? जब डैम की स्थिति इतनी जर्जर थी कि वह किसी भी क्षण ढह सकता था, तो बिना सुरक्षा मानकों के काम क्यों जारी रखा गया? क्या एक गरीब मजदूर की जान की कीमत इन अधिकारियों की फाइलों से कम है?

‘कागजी’ निरीक्षण की खुली पोल

राखड़ डैम का रखरखाव करोड़ों का खेल बन चुका है। कागजों पर मेंटेनेंस के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन झाबू डैम की फटी कोख ने सच्चाई बयां कर दी है।

  • सवाल 1: क्या अधिकारियों की मौजूदगी सिर्फ खानापूर्ति के लिए थी?

  • सवाल 2: जब रिसाव बढ़ रहा था, तो काम को तुरंत रोककर इलाके को खाली क्यों नहीं कराया गया?

  • सवाल 3: क्या घटिया निर्माण सामग्री और भ्रष्टाचार ने इस डैम की बुनियाद को खोखला किया है?

कार्रवाई की मांग, आक्रोश में जनता

इस घटना ने कोरबा के समूचे प्रबंधन तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ राख का सैलाब खेतों और पर्यावरण को तबाह कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक परिवार का चिराग बुझ गया है। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और अब मांग केवल ‘जांच’ की नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की है, जिनकी आंखों के सामने यह तांडव हुआ।

निष्कर्ष: अगर अब भी सरकार और प्रशासन ने इन ‘सफेदपोश’ जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो कोरबा के ऐसे कई और डैम निर्दोषों की कब्रगाह बनते रहेंगे। यह समय संवेदना का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है।