रायपुर, छत्तीसगढ़ | 1 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले का दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र, जो कभी अपनी दुर्गमता और संघर्षों के लिए जाना जाता था, आज देश को बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी दे रहा है।1986 में स्थापित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम, अबूझमाड़ के आदिवासी बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रहा है।
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इसकी सफलता की गूंज मौजूदा खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 में सुनाई दे रही है। छत्तीसगढ़ की पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी इसी आश्रम से निकले हैं।

जहाँ महिला टीम फाइनल में पहुँच चुकी है, वहीं पुरुष टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है।
मुख्य बातें:
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शिक्षा और खेल का संगम: आश्रम वर्तमान में कक्षा 1 से 12वीं तक के 2,700 से अधिक बच्चों का घर है, जहाँ उन्हें मुफ्त शिक्षा के साथ-साथ खेलों में पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाता है।
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विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा: परिसर में तीन फुटबॉल मैदान हैं, जिनमें एक आधुनिक एस्ट्रो-टर्फ भी शामिल है। इसके अलावा बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो और मल्लखंभ के लिए इनडोर एरेना उपलब्ध हैं।
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ऐतिहासिक उपलब्धि: रामकृष्ण मिशन फुटबॉल अकादमी (RKM FA) छत्तीसगढ़ का पहला क्लब है जिसने AIFF के अंडर-17 यूथ कप और आई-लीग 2 में भाग लिया है।
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जीवन में बदलाव: छत्तीसगढ़ फुटबॉल संघ (CFA) के सहायक महासचिव मोहन लाल के अनुसार, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों के लिए खेल एक ‘ट्रांसफॉर्मेटिव’ औजार साबित हुआ है। यहाँ के छात्र न केवल मैदान पर गोल दाग रहे हैं, बल्कि देश की शीर्ष कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों में भी अपनी जगह बना रहे हैं।
घने जंगलों के बीच स्थित यह आश्रम आज एक ऐसी नर्सरी बन चुका है जहाँ केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि भविष्य के डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षाविद भी तैयार हो रहे हैं।
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