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नारी शक्ति का शंखनाद: कोरबा के ढपढप में 21 हजार महिलाओं ने कलश थाम रचा इतिहास

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▪️ हनुमंत कथा के आगाज पर उमड़ा आस्था का महाकुंभ, गूँजे जय श्रीराम के जयकारे

कोरबा/ढपढप। कोरबा जिले के समीपवर्ती ढपढप क्षेत्र में शुक्रवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। दिव्य श्री हनुमंत कथा के भव्य शुभारंभ के अवसर पर क्षेत्र ने भक्ति और अध्यात्म का ऐसा महाकुंभ देखा, जिसकी चर्चा हर ओर हो रही है। करीब 21 हजार महिलाओं ने एक साथ भव्य कलश यात्रा निकालकर न केवल आयोजन का आगाज किया, बल्कि नारी शक्ति और सनातन संस्कृति का शंखनाद भी किया।

पीतांबरी आभा से चमक उठा समूचा क्षेत्र कलश यात्रा का दृश्य इतना अलौकिक था कि जहाँ तक दृष्टि गई, वहाँ केवल पीले वस्त्रों में सुसज्जित श्रद्धा का सैलाब ही नजर आया। सिर पर पवित्र कलश धारण किए हजारों महिलाओं के अनुशासित कदम और जुबां पर “जय श्री राम” व “जय बजरंगबली” के गगनभेदी जयकारों ने पूरे वातावरण को ऊर्जावान बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा क्षेत्र किसी दिव्य लोक में परिवर्तित हो गया हो।

आस्था, समरसता और गौरव का संगम यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता की एक नई मिसाल पेश की। दूर-दराज के गांवों से आई मातृशक्ति की एकजुटता ने यह संदेश दिया कि जब समाज की नींव यानी महिलाएं धर्म संरक्षण के लिए खड़ी होती हैं, तो दिव्यता स्वयं उतर आती है। यात्रा मार्ग पर स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा और शीतल जल सेवा के माध्यम से श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया।

प्रशासन और समिति का अनुकरणीय प्रबंधन इतनी विशाल संख्या (21 हजार से अधिक) में भीड़ जुटने के बावजूद, आयोजन समिति और स्थानीय प्रशासन के बीच गजब का तालमेल देखने को मिला। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था इतनी सुदृढ़ रही कि हजारों की यह पदयात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। स्वयंसेवकों की सजगता ने इस ऐतिहासिक पल को और भी गरिमामय बना दिया।

हनुमंत कथा का उत्साह चरम पर कलश यात्रा की इस अभूतपूर्व सफलता ने आगामी दिनों में होने वाली श्री हनुमंत कथा के प्रति जनमानस के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है। कोरबा की इस पावन धरा पर उमड़ी यह श्रद्धा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि क्षेत्र में सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं।


संक्षेप में मुख्य बिंदु:

  • ऐतिहासिक भागीदारी: करीब 21 हजार महिलाओं की विशाल कलश यात्रा।

  • भक्तिमय माहौल: पीले वस्त्रों और जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा ढपढप।

  • नारी शक्ति: धर्म और संस्कृति के संरक्षण हेतु मातृशक्ति का एकजुट प्रदर्शन।

  • भव्य स्वागत: जगह-जगह पुष्पवर्षा और सेवा शिविरों का आयोजन।

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