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बड़ा बदलाव: 543 से बढ़कर 816 होंगी लोकसभा सीटें? परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर केंद्र का मास्टरप्लान तैयार

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी में जुटी है. सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी चल रही है.

यह प्रस्ताव जनसंख्या के मौजूदा अनुपात को बनाए रखते हुए परिसीमन आयोग के जरिए लागू किया जाएगा, जिसमें कुल सीटों का एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा. सरकार इससे जुड़ा हुआ एक बिल नारी वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक मौजूदा सत्र में ही संसद में पेश कर सकती है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार इस संशोधन विधेयक को लेकर तमाम राजनीतिक दलों (जिनमें एनडीए से जुड़े हुए और विपक्ष से जुड़े हुए राजनीतिक दल शामिल हैं) के साथ एक आम सहमति बनाने की कोशिश में भी लगी हुई है. जानकारी के मुताबिक नए विधेयक में मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या 50 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है.

किन बड़े राज्यों में बढ़ेंगी सीटें

▪️उत्तर प्रदेश की मौजूदा 80 सीटें बढ़कर 120 हो सकती हैं (40 सीटों की वृद्धि).

▪️महाराष्ट्र की मौजूदा 48 सीटें बढ़कर 72 हो सकती हैं (24 सीटों की वृद्धि).

▪️पश्चिम बंगाल में मौजूदा 42 सीटें बढ़कर 63 हो सकती हैं (21 सीटों की वृद्धि).

▪️बिहार में मौजूदा 40 सीटें बढ़कर 60 हो सकती हैं (20 सीटों की वृद्धि.

▪️मध्य प्रदेश में 29 सीटें बढ़कर 44 हो सकती हैं. (15 सीटों की वृद्धि).

▪️राजस्थान में 25 सीटें बढ़कर 38 सीटें होने की संभावना (13 सीटों की वृद्धि).

▪️गुजरात में मौजूदा 26 सीटें बढ़कर 39 सीटें हो सकती हैं ( 13 सीटों की वृद्धि).

मध्यम आकार के राज्यों को भी फायदा

▪️ओडिशा की मौजूदा 21 सीटें बढ़कर 32 हो सकती हैं (11 सीटों की वृद्धि).

▪️झारखंड की मौजूदा 14 सीटें बढ़कर 21 हो सकती हैं (7 सीटों की वृद्धि).

▪️असम की मौजूदा 14 सीटें बढ़कर 21 हो सकती हैं (7 सीटों की वृद्धि).

▪️पंजाब की मौजूदा 14 सीटें बढ़कर 21 हो सकती हैं (7 सीटों की वृद्धि).

▪️छत्तीसगढ़ की मौजूदा 11 सीटें बढ़कर 17 हो सकती हैं (6 सीटों की वृद्धि).

▪️हरियाणा की मौजूदा 10 सीटें बढ़कर 15 हो सकती हैं (5 सीटों की वृद्धि).

▪️दिल्ली की मौजूदा 7 सीटें बढ़कर 11 हो सकती हैं (4 सीटों की वृद्धि).

▪️जम्मू-कश्मीर की मौजूदा 5 सीटें बढ़कर 8 हो सकती हैं (3 सीटों की वृद्धि).

▪️उत्तराखंड की मौजूदा 5 सीटें बढ़कर 8 हो सकती हैं (3 सीटों की वृद्धि).

📍अनुसूचित जाति (SC) के लिए 84 से 126 और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 47 से 70 सीटें प्रस्तावित हैं.

नॉर्थ ईस्ट राज्यों में बढ़ेगी सीटों की संख्या

छोटे राज्य और संघ क्षेत्रों में मामूली, लेकिन सुनिश्चित वृद्धि होगी.

▪️हिमाचल प्रदेश की मौजूदा 4 सीटों में 2 की बढ़ोतरी होगी, जिसे सीटों की संख्या 6 हो जाएगी,

▪️ वही गोवा में मौजूदा 2 सीटों में 1 सीट की बढ़ोतरी होगी, जिससे आंकड़ा 3 हो जाएगा. इस हिसाब से नॉर्थ ईस्ट राज्यों में भी सीटों की संख्या बढ़ेगी, जो इस प्रकार है.

▪️अरुणाचल प्रदेश की मौजूदा 2 सीटें बढ़कर 3 हो सकती हैं (1 सीट की वृद्धि).

▪️सिक्किम की मौजूदा 2 सीटें बढ़कर 3 हो सकती हैं (1 सीट की वृद्धि).

▪️मिजोरम की मौजूदा 2 सीटें बढ़कर 3 हो सकती हैं (1 सीट की वृद्धि).

▪️मणिपुर की मौजूदा 2 सीटें बढ़कर 3 हो सकती हैं (1 सीट की वृद्धि).

▪️त्रिपुरा की मौजूदा 2 सीटें बढ़कर 3 हो सकती हैं (1 सीट की वृद्धि).

▪️मेघालय की मौजूदा 2 सीटें बढ़कर 3 हो सकती हैं (1 सीट की वृद्धि).

कुल मिलाकर अन्य छोटे UT/राज्यों में 20 सीटें बढ़कर 30 हो सकती हैं (10 वृद्धि). यह व्यवस्था मौजूदा संतुलन को बनाए रखते हुए संसद को मजबूत करेगी. यह प्रस्ताव संवैधानिक संशोधन की मंजूरी पर निर्भर करेगा, जिसमें विपक्षी दलों की सहमति जरूरी होगी. दक्षिणी राज्य अपनी जनसंख्या नियंत्रण नीतियों के कारण चिंतित हैं, लेकिन सरकार से जुड़े हुए सूत्रों का दावा है कि कोई राज्य वर्तमान अनुपात से कमजोर नहीं पड़ेगा. 2029 के लोकसभा चुनावों तक यह बदलाव लागू करने की कोशिश रहेगी.

साउथ स्टेट में क्या होगा सीटों में बदलाव

▪️तमिलनाडु की मौजूदा 39 सीटें बढ़कर 59 हो सकती हैं (20 सीटों की वृद्धि).

▪️कर्नाटक की मौजूदा 28 सीटें बढ़कर 42 हो सकती हैं (14 सीटों की वृद्धि).

▪️आंध्र प्रदेश की मौजूदा 25 सीटें बढ़कर 38 हो सकती हैं (13 सीटों की वृद्धि).

▪️केरल की मौजूदा 20 सीटें बढ़कर 30 हो सकती हैं (10 सीटों की वृद्धि).

▪️तेलंगाना की मौजूदा 17 सीटें बढ़कर 26 हो सकती हैं (9 सीटों की वृद्धि).

सरकार नारी वंदन अधिनियम विधेयक पर क्या लेगी फैसला?

हालांकि वैसे तो सरकार नारी वंदन अधिनियम विधेयक संसद के दोनों सदनों में लाकर उसको पारित कर के कानून की शक्ल दे चुकी है, लेकिन उस कानून में 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने की बात कही गई थी. फिलहाल अब सरकार की कोशिश यह है कि कहीं ऐसा ना हो कि 2027 की जनगणना की पूरी प्रक्रिया में वक्त लग जाए और 2029 में महिला आरक्षण लागू न हो पाए. इसी वजह से सूत्रों के मुताबिक सरकार इस नए संशोधन बिल को लाकर ये सुनिश्चित करना चाहती है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन करवा कर महिला आरक्षण को 2029 चुनाव से पहले लागू कर दिया जाए।

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