कोरबा। राख के गुबार और सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त धनरास के ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। एनटीपीसी कोरबा के धनरास स्थित राखड़ बांध (Ash Dyke) से होने वाले प्रदूषण और वादों की वादाखिलाफी के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस आंदोलन के कारण राख परिवहन का मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है और बड़ी संख्या में भारी वाहन जहां-तहां फंस गए हैं।

क्यों सुलग रही है विरोध की आग?
ग्रामीणों का जीना दूभर हो चुका है। बांध से उड़ने वाली राख न केवल उनके फेफड़ों में जहर घोल रही है, बल्कि बहकर आने वाली राख ने खेतों और रिहायशी इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। ग्रामीणों के आक्रोश के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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क्षतिपूर्ति राशि का अता-पता नहीं: नियमतः राखड़ डस्ट से प्रभावित लोगों के लिए क्षतिपूर्ति का प्रावधान है, लेकिन बार-बार के आंदोलनों के बावजूद ग्रामीणों को यह राशि नहीं मिली।
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अधूरे वादे: ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में हुए समझौतों के दौरान घमौटा गांव के समीप वॉटर पंप लगाने और अन्य जनहित कार्यों को प्राथमिकता देने का वचन दिया गया था, जिसे अब तक ठंडे बस्ते में डाल कर रखा गया है।
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प्रशासनिक अनदेखी: अपनी मांगों को लेकर ग्रामीण लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे थे, लेकिन सुनवाई न होने पर उन्हें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा।
ठप हुआ परिवहन, प्रशासन में हड़कंप
अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते राखड़ बांध से होने वाला परिवहन पूरी तरह बाधित है। मार्ग के दोनों ओर ट्रकों की लंबी कतारें लग गई हैं। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस अमल नहीं होता और क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं किया जाता, यह प्रदर्शन जारी रहेगा।
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