नई दिल्ली, 22 मार्च 2026: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों में शुमार रहे केसी त्यागी ने आखिरकार जनता दल यूनाइटेड (JDU) से अपना नाता तोड़ लिया है। रविवार की सुबह दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष जयंत चौधरी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
त्यागी का जेडीयू छोड़ना नीतीश कुमार के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे दशकों से पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में संकटमोचक की भूमिका निभाते रहे थे।
मुख्य आकर्षण:
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बेटे के साथ नई शुरुआत: केसी त्यागी के साथ उनके बेटे ने भी आरएलडी का दामन थामा, जिससे संकेत मिलता है कि अब त्यागी परिवार का राजनीतिक भविष्य उत्तर प्रदेश में केंद्रित रहेगा।
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भावुक संबोधन: सदस्यता लेने के बाद केसी त्यागी ने कहा, “मेरा राजनीतिक जन्म 52 साल पहले चौधरी चरण सिंह के सानिध्य में हुआ था। आज जयंत चौधरी में मुझे उन्हीं की छवि दिखती है। यह मेरे लिए सत्ता का मोह नहीं, बल्कि वैचारिक घर वापसी है।”
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यूपी 2027 का मिशन: त्यागी ने स्पष्ट किया कि वे अब चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि जयंत चौधरी को मजबूत करने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों व पिछड़ों की आवाज बुलंद करने के लिए काम करेंगे।
राजनीतिक मायने: पश्चिमी यूपी और जाट राजनीति में केसी त्यागी का गहरा प्रभाव है। उनके आरएलडी में आने से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है। जेडीयू में रहते हुए भी त्यागी कई बार बीजेपी की कुछ नीतियों पर मुखर रहे थे, जिससे गठबंधन में असहज स्थिति पैदा हो जाती थी। अब आरएलडी में उनकी भूमिका संगठन को वैचारिक मजबूती देने की होगी।
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