वॉशिंगटन/इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़ी गई जंग के बीच पश्चिमी देशों के गठबंधन में बड़ी दरार सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पुराने सहयोगियों (नाटो देशों) पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘डरपोक’ और ‘कागजी शेर’ करार दिया है। ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि ईरान के साथ चल रहे इस भीषण संघर्ष में नाटो देश अमेरिका का खुलकर साथ नहीं दे रहे हैं।
“अमेरिका के बिना नाटो कुछ भी नहीं”
सोशल मीडिया पर जारी एक तीखे पोस्ट में ट्रंप ने गठबंधन की सार्थकता पर सवाल उठाते हुए कहा, “अमेरिका के बिना नाटो सिर्फ एक कागजी शेर है।” ट्रंप का मुख्य गुस्सा ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को लेकर है। वे चाहते हैं कि उनके सहयोगी देश इस समुद्री मार्ग से तेल के जहाजों की आवाजाही सुरक्षित करने के लिए अपनी सेना भेजें, लेकिन सहयोगी देशों ने फिलहाल इससे दूरी बना रखी है।
तेल संकट और नाटो का दोहरा रवैया
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में सहयोगियों के दोहरे रवैये पर तंज कसते हुए लिखा:
“जब सैन्य रूप से यह लड़ाई लगभग जीती जा चुकी है, तब भी वे तेल की ऊंची कीमतों की शिकायत कर रहे हैं। वे होर्मुज स्ट्रेट को खोलने में मदद नहीं करना चाहते, जो कि एक आसान सैन्य अभियान है। यह उनके लिए कम जोखिम वाला काम है, लेकिन वे डरपोक हैं। हम इस धोखे को याद रखेंगे!”
सहयोगियों ने पल्ला झाड़ा: रखीं अपनी शर्तें
ट्रंप के इस दबाव के बावजूद यूरोपीय शक्तियों ने झुकने से इनकार कर दिया है। जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान ने एक साझा बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है:
जर्मनी: चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने दो टूक कहा है कि कोई भी सैन्य सहयोग तभी संभव है जब युद्ध पूरी तरह समाप्त हो जाए।
फ्रांस: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि यूरोपीय संघ का कोई भी देश इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने को तैयार नहीं है। उनके अनुसार, इस समय प्राथमिकता तनाव कम करना और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करना है।
28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध ने न केवल वैश्विक बाजार को हिला दिया है, बल्कि अब दशकों पुराने सैन्य गठबंधनों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
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