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‘चयन’ की सजा और कलश का बोझ: राजधानी की सड़कों पर भविष्य के गुरुजी!

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The khatiya khadi news रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में बुधवार को एक ऐसी ‘कलश यात्रा’ निकली, जिसमें श्रद्धा और व्यवस्था के प्रति ‘शुद्धि’ का भाव ज्यादा था। ये कलश पानी भरने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी फाइलों में दबी 2300 नियुक्तियों का ‘तर्पण’ करने के लिए उठाए गए थे। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

मामला सीधा और थोड़ा मजाकिया भी है—सरकार को स्कूल चलाने के लिए शिक्षक चाहिए, और इन डीएड (DEd) अभ्यर्थियों को नौकरी। ( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) दोनों की जरूरतें मिल रही हैं, चयन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, बस ‘नियुक्ति आदेश’ का वह जादुई कागज गायब है जिसे विभाग शायद किसी तिजोरी में रखकर चाभी भूल गया है।

इंतजार का फल… कड़वा? तुता धरना स्थल से शीतला मंदिर तक की इस शांतिपूर्ण पदयात्रा में अभ्यर्थियों ने बड़े सलीके से प्रशासन को आईना दिखाया। संदेश साफ था—”साहब, हमने पढ़ाई की, परीक्षा दी, मेरिट में आए, अब क्या रिटायरमेंट की उम्र में जॉइनिंग दोगे?”  प्रशिक्षित युवाओं का कहना है कि पद रिक्त हैं, बजट पास है, फिर भी सरकार ‘वेटिंग’ का गेम खेल रही है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

पुलिस का पहरा और खाली कुर्सी का शोर आंदोलन के दौरान पुलिस बल इस मुस्तैदी से तैनात था मानो ये शिक्षित युवा कलश से कोई बम फोड़ने वाले हों। जबकि हकीकत यह है कि असली ‘धमाका’ तो उन सरकारी स्कूलों में हो रहा है जहाँ शिक्षक न होने से पढ़ाई का बंटाधार हो रहा है। प्रशासन ने ज्ञापन तो ले लिया, लेकिन क्या साहब की नींद टूटेगी या फिर से “प्रक्रिया जारी है” वाला पुराना रिकॉर्ड बजने लगेगा?

अभ्यर्थियों ने अब अल्टीमेटम दे दिया है—अगर जल्द ही नियुक्ति का ‘कलश’ नहीं छलका, तो आंदोलन का सैलाब और भी तेज होगा। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग के कान बजते हैं या फिर इन युवाओं को ‘कलश’ के बाद ‘कफन’ यात्रा निकालने पर मजबूर होना पड़ेगा।


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