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मेहनत और कोसा पालन से बदली किस्मत: कोरबा के शिवकुमार बने अन्य किसानों के लिए मिसाल

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कोरबा, 10 मार्च 2026: दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन हो तो सीमित संसाधन भी बड़ी सफलता का रास्ता खोल देते हैं। कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम बरपाली-तानाखार के निवासी श्री शिवकुमार बिंझवार ने इसे सच कर दिखाया है। मात्र 1.5 एकड़ कृषि भूमि वाले एक साधारण परिवार से आने वाले शिवकुमार आज जिले के सबसे उन्नत कोसा कृमिपालकों में गिने जाते हैं।

आर्थिक संबल और शानदार उत्पादन पिछले 15 वर्षों से कोसा पालन से जुड़े शिवकुमार ने वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड उत्पादन किया है। उन्होंने अपनी प्रथम फसल से 20,151 नग और तृतीय फसल से 26,300 नग डाबा कोसाफल का उत्पादन किया। रेशम विभाग के सहयोग से उन्हें कुल 1,21,481 रुपये की आय सीधे उनके बैंक खाते (DBT) में प्राप्त हुई।

शिक्षा और जीवन स्तर में सुधार कोसा पालन से हुई इस कमाई ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है। शिवकुमार ने इस आय से न केवल अपने लिए दोपहिया वाहन खरीदा, बल्कि अपने दोनों पुत्रों की शिक्षा के लिए भी बेहतर इंतजाम किए। उनका बड़ा बेटा रोहित 12वीं और छोटा बेटा राजेश 8वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है।

तकनीकी ज्ञान से मिली सफलता शिवकुमार अपनी सफलता का श्रेय रेशम विभाग द्वारा दी गई आधुनिक तकनीकों को देते हैं। विशेषकर नवंबर से जनवरी के बीच होने वाली तृतीय फसल के दौरान उन्होंने वैज्ञानिक विधियों का पालन कर उत्पादन में भारी बढ़ोतरी की।

25 किसानों को किया प्रेरित शिवकुमार अब अकेले आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि उन्होंने अपने गांव के 20 से 25 किसानों का समूह तैयार किया है। वे इन किसानों को कोसा पालन के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि विभाग से उत्तम गुणवत्ता वाले बीज प्राप्त कर वे इस व्यवसाय को और अधिक विस्तार दें।

शिवकुमार बिंझवार की यह यात्रा साबित करती है कि लगन और सही दिशा में किए गए प्रयास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है।


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