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हिंद महासागर में भीषण संघर्ष: अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबोया, 80 से अधिक की मौत

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कोलंबो/वॉशिंगटन: भारत के विशाखापट्टनम से लौट रहे ईरानी नौसेना के युद्धपोत IRIS Dena पर अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से हमला कर उसे समुद्र में डुबो दिया है। श्रीलंका के तट से लगभग 44 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुए इस हमले में कम से कम 80 से 83 ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की खबर है।

ट्रंप प्रशासन के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे “शांत मृत्यु” (Quiet Death) करार दिया है।


प्रमुख घटनाक्रम: भारत से वापसी के दौरान हमला

ईरानी फ्रिगेट ‘IRIS Dena’ हाल ही में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित ‘International Fleet Review (IFR) 2026’ और ‘मिलन’ युद्धाभ्यास में हिस्सा लेकर वापस लौट रहा था। बुधवार सुबह श्रीलंका के गाले (Galle) तट के पास जब यह जहाज गुजर रहा था, तभी एक अमेरिकी ‘फास्ट अटैक’ पनडुब्बी ने Mark 48 टॉरपीडो से इसे निशाना बनाया।

▪️हमला और तबाही: धमाका इतना भीषण था कि जहाज कुछ ही समय में डूब गया। श्रीलंकाई नौसेना के अनुसार, जहाज पर कुल 180 चालक दल सवार थे।

▪️बचाव कार्य: श्रीलंका ने तत्परता दिखाते हुए अपने जहाज और विमान भेजे, जिससे 32 नौसैनिकों को जिंदा बचा लिया गया है। अब तक 83 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य लापता हैं।

▪️युद्ध का विस्तार: यह हमला अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” (Operation Epic Fury) के पांचवें दिन हुआ है।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का बड़ा बयान

पेंटागन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा:

“एक अमेरिकी पनडुब्बी ने उस ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया जो खुद को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित समझ रहा था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने दुश्मन के लड़ाकू जहाज को टॉरपीडो से नष्ट किया है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और यह हमला इसी रणनीति का हिस्सा है।

भारत के करीब पहुंचा युद्ध का साया

ईरानी जहाज का भारत के विशाखापट्टनम से सीधे लौटते समय डूबना दक्षिण एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रहा है। पूर्व भारतीय नौसेना प्रमुखों ने इस घटना को “भड़काऊ और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन” बताया है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


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