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ट्रंप को लगेगा 179 अरब डॉलर का फटका? सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को बताया ‘अवैध’, अब रिफंड की तैयारी!

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वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे शक्तिशाली आर्थिक हथियार ‘टैरिफ’ पर वहां की सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है। कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को ‘गैर-कानूनी’ घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन को अब तक वसूली गई अरबों डॉलर की राशि कंपनियों को वापस करनी होगी?

कितनी बड़ी है वसूली गई रकम?

अमेरिकी सेंसस ब्यूरो के आंकड़ों और स्टैटिस्टिकल फोरकास्टिंग मॉडल के अनुसार, फरवरी 2025 में जब से ट्रंप ने IEEPA के तहत टैरिफ लगाना शुरू किया था, तब से अब तक लगभग 179 अरब डॉलर (करीब $179 Billion) वसूले जा चुके हैं।

  • दैनिक कमाई: सरकार इस कानून के जरिए रोजाना करीब 500 मिलियन डॉलर जुटा रही थी।

  • कुल हिस्सा: यह टैरिफ सरकार द्वारा हर महीने इकट्ठा किए जाने वाले कुल इंपोर्ट टैक्स का लगभग आधा हिस्सा है।

रिफंड की राह में ‘कानूनी पेंच’

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने फिलहाल रिफंड की प्रक्रिया पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया है, जिससे स्थिति ‘गड़बड़’ (Messy) होने की आशंका है।

  • जस्टिस कैवनॉ का तर्क: उन्होंने कहा कि सरकार ने जो अरबों डॉलर वसूले हैं, उन्हें वापस करना एक जटिल प्रक्रिया होगी।

  • कंपनियां कतार में: ‘कॉस्टको’ जैसी दिग्गज वेयरहाउस चेन समेत कई बड़ी कंपनियों ने रिफंड के लिए पहले ही कानूनी दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया है।

  • टेक्निकल राहत: हालांकि, अनुभवी वकील रॉबर्ट लियो का मानना है कि चूंकि टैरिफ बिल कंप्यूटराइज्ड होते हैं, इसलिए यह पहचानना आसान है कि किसे कितना पैसा वापस मिलना चाहिए। कस्टम एजेंसी भी रिफंड की समय सीमा (Deadline) में छूट देने पर विचार कर रही है।

प्लान ‘बी’ की तैयारी में ट्रंप प्रशासन

भले ही कोर्ट ने IEEPA के तहत टैरिफ को अवैध बताया हो, लेकिन ट्रंप प्रशासन पीछे हटने को तैयार नहीं है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वे इन टैरिफ को दूसरे कानूनों से बदल सकते हैं:

  1. सेक्शन 122 (1974 ट्रेड एक्ट): इसके तहत 15% तक टैरिफ लगाया जा सकता है, लेकिन यह केवल 150 दिनों के लिए ही मान्य होगा।

  2. सेक्शन 301 या 232: इनके इस्तेमाल के लिए कॉमर्स डिपार्टमेंट की ‘फैक्ट-फाइंडिंग’ रिपोर्ट अनिवार्य होगी, जो समय लेने वाली प्रक्रिया है।

निष्कर्ष: अगर रिफंड की प्रक्रिया शुरू होती है, तो यह अमेरिकी खजाने पर भारी बोझ डाल सकती है और ट्रंप की भविष्य की आर्थिक नीतियों को नई चुनौतियों में डाल सकती है।

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