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झांझरा कोयला खदान में गूंजा इंकलाब: चार लेबर कोड और निजीकरण के खिलाफ मजदूर एकजुट, विशाल रैली से भरी हुंकार

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झांझरा/पश्चिम बंगाल: कोयला उद्योग में चल रही देशव्यापी हड़ताल के बीच आज झांझरा की MIC (Massive In-situ Combustion) परियोजना में मजदूरों का भारी आक्रोश देखने को मिला। सुबह 9:30 बजे से ही विभिन्न यूनियनों के बैनर तले सैकड़ों लड़ाकू कोयला मजदूर सड़कों पर उतर आए। यह रैली न केवल एकजुटता का प्रतीक थी, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक खुली चुनौती भी बनकर उभरी।

संयुक्त मोर्चे ने फूंका संघर्ष का बिगुल

इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत IFTU(S), HMS, CITU, INTUC और KMC जैसी प्रमुख यूनियनों का एक मंच पर आना रहा। रैली के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ वेतन की नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग के अस्तित्व और आत्मसम्मान की है।

मजदूरों की प्रमुख मांगें और मुद्दे:

रैली में गूंज रहे नारों ने आंदोलन के रुख को साफ कर दिया है। मजदूरों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

लेबर कोड का विरोध: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए लेबर कोड को मजदूर विरोधी बताते हुए उन्हें तत्काल रद्द करने की मांग।

ठेका प्रथा पर प्रहार: खदानों में बढ़ती ठेका प्रथा को बंद कर सभी को स्थाई नौकरी देने की मांग।

निजीकरण पर रोक: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, विशेषकर कोयला खदानों के निजीकरण के खिलाफ तीखा विरोध।

वेतन और सुविधाओं की सुरक्षा: मजदूरों के वेतन में कटौती और अर्जित सुविधाओं पर किसी भी प्रकार के हमले को बर्दाश्त न करने की चेतावनी।

नारों से थर्राया औद्योगिक क्षेत्र

रैली के दौरान ‘हिटलर-मुशुलिनी’ के उदाहरण देते हुए वर्तमान सत्ता को चेतावनी दी गई। मजदूरों ने “दाढ़ी की न चोटी की, यह संघर्ष है रोटी की” और “जात-धर्म में नहीं बटेंगे, मिलजुल कर संघर्ष करेंगे” जैसे नारों के माध्यम से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को नकारते हुए वर्ग संघर्ष (Class Struggle) को सर्वोपरि बताया।

भावी रणनीति: ‘अभी तो ये अंगड़ाई है’

यूनियन नेताओं ने हड़ताल में शामिल तमाम कोयला मजदूरों का क्रांतिकारी अभिनंदन करते हुए कहा कि आज की यह रैली केवल एक शुरुआत है। यदि सरकार मजदूरों की जायज मांगों को अनसुना करती है, तो आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी उग्र होगा। पूंजीवाद, साम्राज्यवाद और फासीवाद के खात्मे के संकल्प के साथ रैली का समापन हुआ।