Bastar Pandum 2026 : छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचल बस्तर में हाल ही में संपन्न हुए ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव की गूँज अब देश की राजधानी तक पहुँच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन की भव्यता और इसके पीछे के संदेश की सराहना करते हुए बस्तर के बदलते स्वरूप को रेखांकित किया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो क्षेत्र कभी माओवाद और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, आज वह अपनी सांस्कृतिक विरासत और प्रगति के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
सांस्कृतिक गौरव का महाकुंभ: ‘बस्तर पंडुम’
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए बताया कि 7 से 9 फरवरी के बीच आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ ने दुनिया के सामने बस्तर की समृद्ध संस्कृति, अनूठी परंपराओं और जनजातीय विरासत का एक भव्य रूप प्रस्तुत किया है। उन्होंने इस महोत्सव को सफल बनाने वाले छत्तीसगढ़ के ‘परिवारजनों’ को बधाई दी और कहा कि ऐसे आयोजन न केवल विरासत को सहेजते हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के सशक्तीकरण में भी मील का पत्थर साबित होते हैं।
‘माओवाद’ के साये से बाहर निकलता बस्तर
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने बस्तर के अतीत और वर्तमान के अंतर को स्पष्ट रूप से साझा किया। उन्होंने लिखा:
“एक समय था जब बस्तर का नाम आते ही मन में माओवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की तस्वीरें उभरती थीं। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज बस्तर विकास की नई कहानी लिख रहा है और यहाँ के लोगों का आत्मविश्वास देखते ही बनता है।”
भविष्य के लिए उज्ज्वल कामनाएँ
प्रधानमंत्री ने बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आने वाला समय शांति, प्रगति और खुशहाली से भरा हो। उन्होंने जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकार का साझा प्रयास बस्तर को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में स्थापित करना है, जहाँ का सांस्कृतिक गौरव दुनिया भर में पहचाना जाए।








