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बस्तर में ‘सुरक्षा’ बनाम ‘सियासत’: बघेल के तंज पर भाजपा का ‘अंतिम प्रहार’ वाला पलटवार

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रायपुर 11 फरवरी । छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों ‘चिट्ठी’ पर घमासान मचा है। बीजापुर एसपी द्वारा कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी को सुरक्षा कारणों से दौरा न करने की सलाह वाली चिट्ठी ने एक नई राजनीतिक जंग छेड़ दी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के “क्या खत्म हो रहा है?” वाले सवाल पर भाजपा ने अब मोर्चा संभाल लिया है।

▪️ क्या है पूरा मामला?

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने क्षेत्रीय विधायक विक्रम मंडावी को एक आधिकारिक पत्र लिखकर सुरक्षा कारणों से उनके आगामी दौरे को स्थगित करने का अनुरोध किया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि पिल्लूर, एडपल्ली और सन्द्रा जैसे अंदरूनी क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों की सूचना है और वहाँ की सड़कें कच्ची हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा हो सकता है।

▪️ भूपेश बघेल के तीखे सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पत्र को आधार बनाकर सरकार की कार्यप्रणाली पर तीन बड़े सवाल दागे हैं:

  1. झूठे दावे: अमित शाह कहते हैं कि मार्च तक नक्सलवाद जड़ से खत्म हो जाएगा, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि विधायक अपने क्षेत्र में नहीं जा सकते।

  2. सुरक्षा का सच: अगर नक्सली गतिविधियां अभी भी सक्रिय हैं, तो सरकार किस ‘खात्मे’ की बात कर रही है?

  3. कांग्रेस सरकार से तुलना: बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि उनसे बेहतर तो कांग्रेस की सरकार थी, जहाँ कम से कम जनप्रतिनिधि बेरोकटोक अपने क्षेत्र का दौरा तो कर पा रहे थे।

▪️ भाजपा का पलटवार: प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव का बयान

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भूपेश बघेल के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा:

“भूपेश बघेल जी को सुरक्षा मानकों और राजनीति के बीच का अंतर समझना चाहिए। पुलिस अधीक्षक द्वारा सुरक्षा कारणों से सलाह देना एक जिम्मेदार प्रशासन की पहचान है, विफलता की नहीं। हमारी सरकार ने नक्सलवाद को हाशिए पर धकेल दिया है, जिससे बौखलाकर नक्सली हताशा में हैं। विधायक की सुरक्षा सर्वोपरि है और पुलिस ने केवल प्रोटोकॉल का पालन किया है। अमित शाह जी के नेतृत्व में हम निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस के शासन में नक्सली बेखौफ थे क्योंकि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।”

▪️ अजय चंद्राकर का करारा जवाब

साथ ही, वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने भी तंज कसते हुए कहा कि “कांग्रेस को सुरक्षा बलों की सतर्कता पर गर्व होने के बजाय राजनीति सूझ रही है।”

उन्होंने कहा कि:

“भूपेश बघेल जी को नक्सलवाद पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। उनके 5 साल के शासन में नक्सली घटनाएं बढ़ीं और सुरक्षा बलों का मनोबल गिरा। आज जब सुरक्षा बल नक्सलियों को उनके गढ़ में घेर रहे हैं, तो कांग्रेस को इसमें राजनीति दिख रही है। विधायक की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का कर्तव्य है। बघेल जी बताएं कि क्या वे चाहते हैं कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को ताक पर रख दिया जाए?”

▪️ सियासी गलियारों में चर्चा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस समय ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रही है और बस्तर के अंदरूनी इलाकों में कैंप खोलकर नक्सलियों को बैकफुट पर धकेल रही है। वहीं, कांग्रेस इस ‘अलर्ट’ को मुद्दा बनाकर यह साबित करना चाहती है कि भाजपा के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।

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