नई दिल्ली: भारतीय संसदीय इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की है कि वे तब तक सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे, जब तक कि उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो जाता।
क्या है पूरा मामला?
बीते मंगलवार को विपक्षी दलों ने एकजुट होकर स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। विपक्ष का आरोप है कि सदन के कामकाज के दौरान स्पीकर का व्यवहार पक्षपातपूर्ण रहा है और उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा।
नैतिकता का हवाला देकर छोड़ी कुर्सी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओम बिरला ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए यह तय किया है कि जब उनके पद की गरिमा पर ही सवाल उठाया गया है, तो उनका चेयर (पीठासीन अधिकारी की कुर्सी) पर बैठना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग के जरिए स्थिति साफ नहीं हो जाती, वे सदन के भीतर नहीं जाएंगे।
प्रमुख बिंदु और आगामी घटनाक्रम
-
चर्चा की संभावित तारीख: सूत्रों की मानें तो बजट सत्र के दौरान 9 मार्च को स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर सदन में विस्तृत चर्चा हो सकती है।
-
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया: ओम बिरला के इस फैसले ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को हैरान कर दिया है। माना जा रहा है कि सदन की गरिमा और सुचारू कामकाज को देखते हुए दोनों पक्ष उन्हें मनाने की कोशिश कर सकते हैं।
-
संवैधानिक स्थिति: जब तक स्पीकर अनुपस्थित रहेंगे, तब तक सदन की कार्यवाही डिप्टी स्पीकर या पैनल ऑफ चेयरपर्सन्स के सदस्यों द्वारा संचालित की जाएगी।
विशेष : यह पहली बार नहीं है जब सदन में खींचतान देखी गई हो, लेकिन स्पीकर का स्वयं चर्चा होने तक कुर्सी से दूरी बनाना उनके संसदीय सिद्धांतों के प्रति कड़े रुख को दर्शाता है।
अब सबकी निगाहें 9 मार्च पर टिकी हैं। क्या विपक्ष अपने आरोपों पर कायम रहेगा या सत्ता पक्ष के साथ मिलकर कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा? फिलहाल, ओम बिरला के इस फैसले ने केंद्र की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।








