रायपुर | छत्तीसगढ़ के लाखों आयुष्मान कार्डधारियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य के निजी अस्पतालों ने 30 जनवरी को आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज बंद रखने का ऐलान किया है। एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI) ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार द्वारा पिछले एक साल से लंबित भुगतानों के कारण अब अस्पतालों के पास इलाज रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
निजी अस्पतालों का कहना है कि सरकार की ओर से बकाया राशि का भुगतान न होना उनकी आर्थिक कमर तोड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार:
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लंबित अवधि: पिछले वित्तीय वर्ष (जनवरी-मार्च 2025) और चालू वित्तीय वर्ष (जुलाई 2025 से अब तक) का भुगतान अटका हुआ है।
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बकाया राशि: स्वास्थ्य विभाग हर महीने औसतन 180-200 करोड़ रुपये का भुगतान करता है, इस लिहाज से करीब 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित है।
“दवाइयों, जांच, ऑपरेशन और स्टाफ के वेतन का खर्च पहले अस्पताल को उठाना पड़ता है। भुगतान न मिलने से अस्पतालों की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है।” > — डॉ. राकेश गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, AHPI
पोस्टर जारी कर दी अंतिम चेतावनी
अस्पतालों ने सोशल मीडिया और परिसर में पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। इन पोस्टरों में स्पष्ट लिखा है कि ‘सरकार से भुगतान न मिलने के कारण हम उपचार करने में असमर्थ हैं।’ संगठन ने संकेत दिया है कि 30 जनवरी का बंद केवल एक चेतावनी है। यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस योजना को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जा सकता है।
मरीजों पर पड़ेगा सीधा असर
इस हड़ताल का सबसे बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों पर पड़ेगा, जो गंभीर बीमारियों के ऑपरेशन और इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं। 30 जनवरी को निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के जरिए भर्ती या नए इलाज की सुविधा नहीं मिल पाएगी।








