Latest News
छत्तीसगढ़ में अनोखा मामला: DEO ने थाना प्रभारी को थमाया नोटिस, 7 साल तक जेल में बंद रहा शिक्षक और विभाग को भनक तक नहीं लगी! 4 करोड़ का कैश, सीक्रेट चेंबर और कोर्ट का झटका: छत्तीसगढ़ के चर्चित कैश जब्ती मामले में आया नया मोड़! लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती पर गूंजा राष्ट्रीय एकता का संकल्प, मंत्री लखन लाल देवांगन व भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने अर्पित किए श्रद्धासुमन चक्रवात ‘अर्नब’ का कहर: छत्तीसगढ़ में प्रभावित किसानों को जल्द मिलेगी राहत, सीएम साय ने दिए सर्वे के निर्देश छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के बाद सियासी घमासान: सुधांशु त्रिवेदी बोले— ‘जंगल से नक्सलवाद गया, पर दिल्ली में ‘दिमागी नक्सल’ बाकी’ रात को सोते समय पैरों के तलवों में जलन क्यों होती है? जानिए कारण, राहत के उपाय और कब लें डॉक्टर की सलाह
Home » Uncategorized » Chhattisgarh : कुर्सी की साख और अश्लीलता का ‘ओपेरा’

Chhattisgarh : कुर्सी की साख और अश्लीलता का ‘ओपेरा’

Share:

 

The khatiya khadi news: लोकतंत्र में प्रशासनिक पद केवल अधिकारों का पुलिंदा नहीं होते, बल्कि वे सार्वजनिक नैतिकता और मर्यादा के मानक भी होते हैं। लेकिन गरियाबंद जिले के मैनपुर से जो मामला सामने आया है, उसने नौकरशाही के चेहरे पर कालिख पोतने का काम किया है। रायपुर संभाग के आयुक्त (कमिश्नर) एम.डी. कांवरे द्वारा डिप्टी कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी (SDM) तुलसीदास मरकाम को निलंबित करने का आदेश केवल एक दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक शुचिता को बचाने की एक अनिवार्य कोशिश है।

मामला केवल एक मनोरंजन कार्यक्रम की अनुमति देने तक सीमित नहीं है। गंभीर सवाल तब उठते हैं जब एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर एक ही दिन में आवेदन पर मुहर लगा देता है और फिर उस कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराता है जहाँ फूहड़ता और अश्लीलता का नंगा नाच हो रहा हो। एसडीएम मरकाम का उस ‘ओपेरा’ में मौजूद रहना और अपनी आंखों के सामने हो रही अशोभनीय गतिविधियों को न रोकना यह दर्शाता है कि उन्होंने अपनी ‘कुर्सी की साख’ को मनोरंजन की वेदी पर चढ़ा दिया। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 स्पष्ट रूप से लोक सेवकों से उच्च नैतिक चरित्र की अपेक्षा करता है। जब एक SDM स्तर का अधिकारी सार्वजनिक रूप से अश्लीलता को मूक सहमति देता है, तो समाज में यह संदेश जाता है कि कानून और मर्यादा केवल साधारण नागरिकों के लिए हैं, रसूखदारों के लिए नहीं। कमिश्नर एम.डी. कांवरे ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस दिखाते हुए जो कड़ा रुख अपनाया है, वह सराहनीय है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि कर्तव्य के प्रति ‘हल्कापन’ और नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

यह घटना उन सभी लोक सेवकों के लिए एक सबक है जो पद के मद में यह भूल जाते हैं कि उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति भी शासन की उपस्थिति मानी जाती है। प्रशासन की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब अधिकारी मनोरंजन और मर्यादा के बीच की महीन रेखा को पहचानें। उम्मीद है कि यह कार्रवाई केवल एक उदाहरण बनकर नहीं रह जाएगी, बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक अधिकारियों के सार्वजनिक आचरण में सुधार का आधार बनेगी।