प्रयागराज | संगम की रेती पर शनिवार को पौष पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ 44 दिवसीय माघ मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद पहले ही दिन आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा और शाम तक 19 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में डुबकी लगाई। इस बार मेले की भव्यता और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने पूरे आयोजन के दौरान करीब 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना जताई है।
प्रमुख आकर्षण और व्यवस्थाएं
प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सात सेक्टरों में टेंट सिटी और पांटून पुलों का निर्माण किया गया है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पहली बार मेले में हेलीकॉप्टर सेवा और पैराग्लाइडिंग की शुरुआत भी की जा रही है। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लोकप्रिय कलाकारों को आमंत्रित करने की योजना है।
किन्नर अखाड़े का ऐतिहासिक ‘अमृत स्नान’
इस वर्ष का माघ मेला एक नई पहचान का साक्षी बना। सनातनी किन्नर अखाड़े ने पहली बार मेले में अपना शिविर लगाया है। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंद गिरी (टीना मां) के नेतृत्व में अखाड़े के सदस्यों ने संगम तट पर ‘अमृत स्नान’ किया, जिसे सनातन परंपरा में समावेशिता का प्रतीक माना जा रहा है।
कल्पवास का संकल्प
पौष पूर्णिमा से ही कल्पवासियों का कठिन व्रत आरंभ हो गया है। संगम की रेती पर बसे तंबुओं के शहर में लगभग 20 लाख कल्पवासी आगामी एक महीने तक प्रवास करेंगे। आचार्य चौक, दंडीवाड़ा और खाक चौक सहित सभी प्रमुख शिविर कल्पवासियों के स्वागत के लिए सज चुके हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। यातायात प्रबंधन के साथ-साथ ATS (एटीएस) और NDRF (एनडीआरएफ) की टीमों को तैनात किया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि रविवार तड़के तक श्रद्धालुओं की संख्या 25 से 30 लाख तक पहुंच सकती है।
माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां
| स्नान पर्व | तिथि |
| पौष पूर्णिमा | 3 जनवरी |
| मकर संक्रांति | 14 जनवरी |
| मौन अमावस्या | 18 जनवरी |
| बसंत पंचमी | 23 जनवरी |
| माघी पूर्णिमा | 1 फरवरी |
| महाशिवरात्रि | 15 फरवरी |








