ठाणे, 6 दिसंबर। महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यकर्ता द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई को 20 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है।
मामले में यह निर्णय अभियोजन पक्ष के एक महत्वपूर्ण गवाह की अनुपलब्धता के कारण लिया गया।
राहुल के वकील नारायण अय्यर ने पुष्टि की कि गवाह अशोक सायकर, जो वर्तमान में सोलापुर के बार्शी में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) हैं, व्यक्तिगत कारणों से अदालत में पेश नहीं हो सके।
क्यों है यह गवाह इतना अहम?
सायकर की गवाही को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी गवाही अब 29 दिसंबर को दर्ज होने की संभावना है। 2014 में पुलिस उपनिरीक्षक (PSI) के रूप में उन्होंने ही दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-202 के तहत मानहानि मामले की शुरुआती जांच की थी।
सायकर द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत ने बाद में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-500 के तहत राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था।
क्या है पूरा मामला?
यह आपराधिक मानहानि का मुकदमा आरएसएस के स्थानीय कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने दायर किया था। कुंटे ने 6 मार्च 2014 को भिवंडी के पास एक चुनावी रैली में दिए गए राहुल गांधी के कथित बयान पर आपत्ति जताई थी। राहुल गांधी ने कथित रूप से कहा था कि “आरएसएस के लोगों ने (महात्मा) गांधी की हत्या की थी।”
भिवंडी के संयुक्त दीवानी न्यायाधीश, जूनियर डिवीजन पीएम कोलसे मामले की सुनवाई कर रहे हैं।
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पिछली सुनवाई: इससे पहले, 15 नवंबर को भी सुनवाई टली थी, जब शिकायतकर्ता के वकील ने सायकर को गवाह के रूप में बुलाने की अनुमति मांगी थी।
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आगे क्या: यह मामला पहले 29 नवंबर के लिए निर्धारित था, लेकिन राहुल गांधी की कानूनी टीम ने उनकी अनुपलब्धता का हवाला देकर स्थगन की मांग की थी, जिसके बाद अब सुनवाई 20 दिसंबर को फिर शुरू होगी।








