अंबिकापुर 31/10/2026: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है, जहां जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने थानेदार को ही नोटिस जारी कर दिया है। अंबिकापुर DEO द्वारा थाना प्रभारी से समय-सीमा में जवाब तलब करने के इस कदम से शिक्षा और पुलिस दोनों विभागों में भारी हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा वाकया तब उजागर हुआ जब अंबिकापुर कलेक्टर अजीत वसंत ने विभागीय कार्यों में सख्ती दिखाई और फाइलों की पन्ने पलटे गए। जांच में पता चला कि उदयपुर विकासखंड के पेण्डरखी स्कूल के प्रधान पाठक विजय कुमार यादव को मणिपुर थाने में 18 अगस्त 2019 को आपराधिक मामलों (धारा 147, 148, 149, 294, 323, 307 के तहत अपराध क्रमांक 499/2019) में गिरफ्तार किया गया था। सत्र न्यायालय से सजा मिलने के बाद वह 3 जनवरी 2026 से 9 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय जेल अंबिकापुर में बंद रहे।
नियमों के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार होता है या 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहता है, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को देना पुलिस की वैधानिक जिम्मेदारी होती है, ताकि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जा सके। हालांकि, मणिपुर थाने ने यह सूचना 2019 में नहीं दी। आखिरकार, उदयपुर बीईओ के पत्राचार के बाद 13 अक्टूबर 2026 को थाने से विभाग को आधिकारिक सूचना भेजी गई।
DEO द्वारा थाना प्रभारी से पूछे गए 3 तीखे सवाल
कलेक्टर की फटकार के बाद DEO ने पहले तत्कालीन बीईओ को नोटिस दिया और उसके बाद सीधे मणिपुर थाना प्रभारी को तलब करते हुए निम्नलिखित तीखे सवाल पूछे:
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विलंब का कारण: 2019 की गिरफ्तारी और जेल में रहने की सूचना शिक्षा विभाग को देने में पूरे 7 साल की देरी क्यों हुई?
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पूर्व सूचना का प्रमाण: क्या 18 अगस्त 2019 को गिरफ्तारी या सजा के समय बीईओ या डीईओ को कोई मौखिक या लिखित सूचना दी गई थी? यदि हां, तो उसका जावक नंबर और पावती की प्रति प्रस्तुत करें।
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जिम्मेदारी का निर्धारण: इतने वर्षों तक सूचना छिपाने या न देने के कारण शिक्षक के खिलाफ समय पर विभागीय कार्रवाई बाधित हुई, इसके लिए थाने में किसकी जवाबदेही तय की गई है?
क्या नोटिस के पीछे छिपा है कोई ‘खेल’?
शिक्षा विभाग के गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगने के पीछे कहीं तत्कालीन बीईओ को बचाने की रणनीति तो नहीं है? सवाल यह उठ रहा है कि जब 7 साल तक बीईओ कार्यालय को भी अपने ही प्रधान पाठक के जेल में होने की खबर नहीं लगी, तो क्या अब सारा ठीकरा पुलिस विभाग पर फोड़ा जा रहा है? बहरहाल, डीईओ और थाना प्रभारी के बीच यह नोटिस-युद्ध पूरे सरगुजा संभाग में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।



