दुर्ग-भिलाई, 31 अक्टूबर 2026 Durg Cash Seizure: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हुए 4 करोड़ रुपए के हाई-प्रोफाइल कैश जब्ती मामले ने एक नया और दिलचस्प मोड़ ले लिया है। रायपुर-दुर्ग मार्ग पर पुलिस की चेकिंग के दौरान बोलेरो पिकअप के गुप्तखाने (सीक्रेट चेंबर) से पकड़ी गई इस बेनामी रकम पर अपना दावा ठोकने वाले कारोबारी कमलेश आर. शाह को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कारोबारी के सभी आवेदनों को खारिज करते हुए फिलहाल राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।

क्या था पूरा मामला?
बीती 25 अक्टूबर की रात दुर्ग पुलिस रायपुर से नागपुर जा रही एक सफेद रंग की बोलेरो मैक्स पिकअप की सामान्य जांच कर रही थी। जब वाहन की गहराई से तलाशी ली गई, तो उसके पिछले हिस्से में एक ऐसा सीक्रेट चेंबर मिला जिसे देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। इस गुप्तखाने से 500, 200 और 100 रुपए के नोटों के बंडलों के रूप में कुल 4 करोड़ रुपए कैश बरामद हुए। मौके पर संतोषजनक दस्तावेज और जवाब न मिलने पर पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 106 के तहत नकदी और वाहन दोनों को अपने कब्जे में ले लिया था।
‘मेरे खाते में 53 करोड़, यह मेरे बिजनेस का पैसा है’
कारोबारी कमलेश आर. शाह ने अपने वकील के माध्यम से अदालत में याचिका दायर कर दावा किया था कि यह पूरी रकम उनकी वैध कमाई है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनकी दिवंगत पत्नी नीना शाह ‘मेसर्स मेक टेक’ (M/S MECTEC) नाम से कृषि से जुड़ा बड़ा कारोबार करती थीं, और अकोला कोर्ट ने उन्हें व उनकी बेटियों को इसका कानूनी वारिस घोषित किया है।
कारोबारी का तर्क था कि उनकी फर्म का टर्नओवर करोड़ों में है, उन्होंने वित्त वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ से ज्यादा का टैक्स चुकाया है और उनकी ऑडिट रिपोर्ट में 53 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति का जिक्र है। उनका कहना था कि व्यापारिक सिलसिले में जेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की गाड़ी के जरिए यह पैसा रायपुर से नागपुर भेजा जा रहा था, और सुरक्षा कारणों के चलते इसे गाड़ी में बने सीक्रेट चेंबर में छिपाकर रखा गया था।
जांच एजेंसियों का कड़ा विरोध और कोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान पुलिस और आयकर विभाग (Income Tax Department) ने कारोबारी के इन तमाम दावों का पुरजोर विरोध किया। एजेंसियों ने अदालत को बताया कि गाड़ी में सवार लोगों और कारोबारी के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर है। शुरुआती पूछताछ में जहां इसे ट्रांसपोर्ट कारोबार का धन बताया गया, वहीं बाद में इसे किसी अन्य फर्म से जुड़ा हुआ बताया जाने लगा। इसके अलावा, जिन लोगों के पास से कैश पकड़ा गया वे वाकई कारोबारी के कर्मचारी हैं या नहीं, इसके भी कोई पुख्ता सबूत या दस्तावेज पेश नहीं किए गए। आयकर विभाग ने इस संबंध में अपनी 9 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट भी कोर्ट के सामने रखी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंजली सिंह की अदालत ने कारोबारी कमलेश शाह की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि चूंकि इस मामले की गहन जांच आयकर विभाग कर रहा है, इसलिए जांच के निष्कर्ष तक यह 4 करोड़ रुपए कारोबारी को वापस नहीं सौंपे जा सकते।
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