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रायपुर में गरजे देवकीनंदन ठाकुर: “देश में बने ‘सनातन बोर्ड’, मंदिरों के पैसे से रुक सकता है धर्म परिवर्तन”

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“पैसों के अभाव में हो रहा धर्म परिवर्तन, मंदिरों का धन बने ढाल”

रायपुर 13 जुलाई। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में इन दिनों आध्यात्मिक माहौल है। विख्यात आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर बीते तीन दिनों से यहाँ श्रीमद्भागवत कथा और सनातन संस्कृति पर उपदेश दे रहे हैं। कथा के बीच मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने देश के समसामयिक और धार्मिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। मंदिरों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और हालिया विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने देश में ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की पुरजोर वकालत की है।

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“वक्फ बोर्ड की तर्ज पर हो सनातन बोर्ड का गठन”

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि देश में सनातन संस्कृति और मंदिरों की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक स्वायत्त संस्था की जरूरत है। उन्होंने तर्क दिया:

“जिस तरह अल्पसंख्यकों के लिए वक्फ बोर्ड काम करता है, ठीक उसी तरह देश में ‘सनातन बोर्ड’ का गठन होना चाहिए। आजादी के बाद से ही सरकारों द्वारा मंदिरों के धन का दुरुपयोग किया गया है। अगर आजादी के तुरंत बाद एक ऐसा बोर्ड बना दिया जाता, जिसमें चारों शंकराचार्य, पांच वैष्णवाचार्य और प्रमुख धार्मिक गुरु शामिल होते, तो स्थितियां आज बिल्कुल अलग होतीं।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि मंदिरों के चढ़ावे और धन का सदुपयोग देश के गरीब भाई-बहनों की मदद, आधुनिक गुरुकुलों की स्थापना और गो-सेवा के लिए किया जाता, तो भारत आज निश्चित रूप से ‘विश्वगुरु’ बन चुका होता। दुर्भाग्य यह है कि कुछ लोगों की नजर सिर्फ मंदिरों के पैसे पर रहती है, जिसके कारण चोरी और गबन जैसी घटनाएं सामने आती हैं।

“पैसों के अभाव में हो रहा धर्म परिवर्तन, मंदिरों का धन बने ढाल”

छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में बात करते हुए आध्यात्मिक गुरु ने धर्म परिवर्तन के गंभीर मुद्दे को भी छुआ। उन्होंने कहा कि रायपुर और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में हमारे आदिवासी भाई-बहन और समाज के अन्य पिछड़े वर्ग के लोग सिर्फ आर्थिक तंगी और संसाधनों के अभाव में धर्म परिवर्तन कर लेते हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों न इन जरूरतमंदों की मदद के लिए मंदिरों के धन का उपयोग किया जाए? देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार:

  • समाधान: सनातन बोर्ड ही एकमात्र उचित व्यवस्था है।

  • बदलाव: मंदिरों और धार्मिक स्थलों का प्रबंधन संतों और धर्माचार्यों को सौंप दिया जाना चाहिए।

  • असर: जब धर्माचार्य समाज सेवा में सीधे जुड़ेंगे, तो न केवल वित्तीय गड़बड़ियां (चोरी) रुकेंगी, बल्कि सनातन धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार भी होगा।

राम मंदिर ट्रस्ट विवाद के बीच फिर उठी मांग

यह पहली बार नहीं है जब देवकीनंदन ठाकुर ने ‘सनातन बोर्ड’ की मांग की है, लेकिन इस बार उनकी यह मांग बेहद संवेदनशील समय पर आई है। हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद से देश भर में मंदिर प्रबंधनों को लेकर बहस छिड़ी हुई है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) जांच कर रहा है। विवाद और जांच के बीच ही राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे माहौल में देवकीनंदन ठाकुर का यह बयान मंदिर प्रबंधन में बड़े सुधारों की जरूरत की ओर इशारा करता है।

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