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⚡ छत्तीसगढ़ में बड़ा बिजली संकट: प्रबंधन से वार्ता विफल, विद्युत संविदा कर्मचारियों का ‘अनिश्चितकालीन कामबंद’ आंदोलन शुरू

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रायपुर, 23 जून। छत्तीसगढ़ में सरकारी बिजली कंपनियों के संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन को और उग्र कर दिया है। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ (पंजीयन क्रमांक – 722) और छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी (CSPDCL) के उच्च प्रबंधन के बीच सोमवार (22 जून) को हुई द्विपक्षीय वार्ता पूरी तरह विफल हो गई है। इसके विरोध में कर्मचारियों ने ‘अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन’ का एकतरफा ऐलान कर दिया है, जिससे पूरे प्रदेश की बिजली आपूर्ति और मैदानी रखरखाव व्यवस्था पर गहरा संकट मंडराने लगा है।

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संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी एक सूत्रीय मांग—नियमितीकरण (Regularization) की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कोई भी कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेगा।

प्रबंधन के रवैये से नाराज कर्मचारी: वार्ता की टेबल पर नहीं पहुंचे सक्षम अधिकारी

संघ के प्रदेश अध्यक्ष  हरिचरण साहू और महामंत्री  कमलेश भारद्वाज ने संयुक्त बयान में बताया कि पॉवर कंपनी प्रबंधन के लिखित आमंत्रण पर वे 22 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के अध्यक्ष (Chairman) के साथ बैठक के लिए पहुंचे थे। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि संविलियन और रिक्त पदों पर समायोजन जैसे मुख्य एजेंडे पर सकारात्मक चर्चा होगी।

“मीटिंग में बात करने के लिए कोई भी सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं हुआ और प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया। प्रबंधन के इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और उदासीन रवैये से आहत होकर हमने आंदोलन के द्वितीय चरण को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।”

विद्युत संविदा कर्मचारी संघ

आंकड़ों का खेल: “पुराने कर्मियों को 2 साल में नियमितीकरण, हमारा 10 वर्षों से शोषण”

संविदा कर्मचारी संघ ने बिजली कंपनी के दोहरे मापदंडों को उजागर करते हुए कुछ ऐतिहासिक तथ्य और आंकड़े सामने रखे हैं:

  • 2007, 2009 और 2011 का रिकॉर्ड: तत्कालीन भाजपा सरकार के समय संविदा पर आए कर्मचारियों को महज 2 साल की सेवा के बाद क्रमशः 2009, 2011 और 2013 में नियमित कर दिया गया था।

  • 2016 और 2018 के कर्मियों का शोषण: इसके विपरीत, वर्ष 2016 और 2018 में भर्ती हुए संविदा कर्मियों को काम करते हुए 8 से 10 वर्ष पूरे होने वाले हैं, लेकिन उन्हें आज तक नियमितीकरण का लाभ नहीं मिला है।

  • जोखिम भरा काम, कम वेतन: संघ का कहना है कि मैदानी काम पूरी तरह ‘स्थायी प्रकृति’ के हैं। नियमित स्टाफ की कमी को छुपाने के लिए प्रबंधन इन संविदा कर्मियों से बेहद कम वेतन में जानलेवा और जोखिम भरे काम करवा रहा है।

सामाजिक सुरक्षा और अस्तित्व की लड़ाई: हादसों में 41 की मौत

कर्मचारियों के मुताबिक, यह आंदोलन केवल वित्तीय लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की लड़ाई है। लाइनमैन और तकनीकी कर्मचारियों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। संघ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • बिजली लाइनों के रखरखाव के दौरान हुए हादसों में अब तक 41 संविदा कर्मचारियों की असमय मौत हो चुकी है।

  • सैकड़ों कर्मचारी करंट की चपेट में आने से स्थायी या अस्थायी रूप से अपंग (Handicapped) हो चुके हैं।

  • संघ का आरोप है कि इतने बड़े हादसों के बाद भी पॉवर कंपनी प्रबंधन का रवैया पीड़ित परिवारों के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन बना हुआ है।

मैदानी स्तर पर मोर्चा संभाल रही टीम

आंदोलन को पूरे छत्तीसगढ़ में सुचारू रूप से संचालित करने के लिए संघ के पदाधिकारियों ने मैदानी स्तर पर कमान संभाल ली है:

क्षेत्र/नेतृत्व जिम्मेदारी संभाल रहे पदाधिकारी
प्रांतीय नेतृत्व  हरिचरण साहू (अध्यक्ष),  कमलेश भारद्वाज (महामंत्री),  नंदलाल दास (उपाध्यक्ष),  योगेश साहू (संयुक्त महामंत्री)
बिलासपुर क्षेत्र  विजय प्रकाश बंजारे
रायगढ़ क्षेत्र  नंद कुमार मरकाम
रायपुर (शहरी/ग्रामीण)  जीवराज सोनकर (शहरी),  वीर सिंह बरेठ (ग्रामीण)
दुर्ग और राजनांदगांव  अनिल दिवाकर (दुर्ग),  संदीप गजेंद्र (राजनांदगांव)
अंबिकापुर क्षेत्र  तपन राम पैंकरा

जनता से अपील: “लिखित आदेश तक एक इंच पीछे नहीं हटेंगे”

संघ के कोर डेलिगेट्स ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक छत्तीसगढ़ सरकार और बिजली कंपनी का उच्च प्रबंधन नियमितीकरण की दिशा में कोई ठोस लिखित आदेश जारी नहीं करता, तब तक यह हड़ताल समाप्त नहीं होगी। इसके साथ ही संघ ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से आम जनता से भी अपील की है कि वे बिजली आपूर्ति बाधित होने पर कर्मचारियों की इस मजबूरी को समझें और उनका समर्थन करें।

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