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छत्तीसगढ़ का ‘सायको किलर’: बलौदाबाजार के खर्वे गांव में 8 ग्रामीणों की हत्या का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा

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बलौदाबाजार, 23 जून।

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले से एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम खर्वे में पिछले तीन महीनों के भीतर हुई 8 ग्रामीणों की रहस्यमयी और संदिग्ध मौतों के पीछे की कड़वी सच्चाई आखिरकार सामने आ गई है। पुलिस ने इस मामले में गांव के ही एक ‘सीरियल किलर’ को गिरफ्तार किया है, जिसने बेहद शातिराना अंदाज में इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।

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आरोपी का परिचय और हत्या की खौफनाक वजहें

पुलिस के अनुसार, इस खूनी खेल का मास्टरमाइंड गांव का ही रामसहाय जायसवाल (उम्र 46 वर्ष) है। आरोपी ने पूछताछ में जो खुलासे किए हैं, उसने पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। आरोपी रामसहाय ने अलग-अलग ग्रामीणों की हत्या करने के लिए कई तरह की रंजिशों और सनक को वजह बताया:

  • पुरानी रंजिश और विवाद: कुछ ग्रामीणों से उसका पुराना जमीनी या व्यक्तिगत विवाद था।

  • पत्नी पर गलत नजर का शक: आरोपी को शक था कि गांव के कुछ लोग उसकी पत्नी पर बुरी नीयत रखते हैं।

  • कर्ज का लेन-देन: कुछ मृतकों के साथ उसका पैसों का विवाद और कर्ज का मामला था।

  • अंधविश्वास (टोना-टोटका): आरोपी के मन में यह अंधविश्वास बैठ गया था कि गांव के कुछ लोग उस पर जादू-टोना कर रहे हैं, जिससे उसका नुकसान हो रहा है।

कुत्ते पर किया था जहर का ‘ट्रायल’

पुलिस जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई कि आरोपी रामसहाय जायसवाल ने सामूहिक हत्याकांड की पूरी प्लानिंग पहले से कर रखी थी। उसने बाजार से चूहे मारने के नाम पर एक बेहद खतरनाक और जानलेवा जहरीला पदार्थ खरीदा। अपनी योजना को पुख्ता करने के लिए उसने सबसे पहले इस जहर की कुछ बूंदें गांव के एक आवारा कुत्ते को खिलाकर उसका ‘परीक्षण’ (Trial) किया। जब कुत्ते की तड़प-तड़प कर मौत हो गई, तब उसे यकीन हो गया कि यह जहर इंसानों को खत्म करने के लिए काफी है। इसके बाद उसने अलग-अलग तारीखों में मौका पाकर उन ग्रामीणों को निशाना बनाया जिनसे वह खुन्नस रखता था और उन्हें शराब में जहर मिलाकर पिला दिया।

कब्रों से निकाले गए 7 शव, ऐसे खुला राज

खर्वे गांव में मार्च महीने से लेकर अब तक लगातार एक के बाद एक मौतें हो रही थीं। तीन महीनों में 8 लोगों की मौत से पूरा गांव खौफ के साए में जी रहा था। मामले में मोड़ तब आया जब ग्रामीणों का सब्र टूट गया और उन्होंने 6 जून को एसडीएम कसडोल को एक लिखित आवेदन सौंपकर इन मौतों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

ग्रामीणों के भारी संदेह और आक्रोश को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस ने सनसनीखेज कदम उठाते हुए दफनाए जा चुके 7 शवों को कब्र से बाहर निकलवाया। इन शवों का डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा पोस्टमॉर्टम कराया गया और विसरा को फॉरेंसिक लैब (FSL) जांच के लिए भेजा गया, जहां रिपोर्ट में जहर (पॉइजनिंग) की पुष्टि हुई।

पुलिस की तफ्तीश और आरोपी की गिरफ्तारी

बलौदाबाजार पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल टावर लोकेशन और ग्रामीणों से कड़ाई से पूछताछ शुरू की। शक की सुई रामसहाय पर जाकर टिकी। शुरुआती दौर में आरोपी पुलिस को गुमराह करता रहा और मुकरता रहा, लेकिन जब पुलिस ने उसके सामने पुख्ता तकनीकी सबूत और गवाहों के बयान रखे, तो वह टूट गया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

मंगलवार को पुलिस की भारी टीम आरोपी रामसहाय को लेकर उसके घर, दुकान और उन तमाम घटनास्थलों पर पहुंची जहाँ उसने वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उसके पास से बचा हुआ जहरीला पदार्थ और अन्य अहम सबूत बरामद कर लिए हैं।

21 लोगों की बलि की अफवाह और गांव में तनाव

इस खौफनाक सिलसिलेवार मौतों के बाद खर्वे गांव में भारी आक्रोश और तनाव का माहौल है। लगातार हो रही मौतों के बीच इलाके में यह अफवाह और चर्चा भी तेजी से फैल गई थी कि आरोपी तांत्रिक क्रियाओं के चक्कर में 21 लोगों की बलि देने की फिराक में था। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इस बात का पूरी तरह से खंडन किया है। पुलिस का कहना है कि जांच में ‘नरबलि’ या अंधविश्वास के तहत सामूहिक बलि देने का कोई भी प्रामाणिक सबूत नहीं मिला है; यह विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत रंजिश, शक और आपराधिक सनक का मामला है। फिलहाल गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात है और आरोपी को जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।

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