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आदिवासियों के हक के लिए राष्ट्रपति की शरण में डॉ. चरणदास महंत: वन भूमि के जलाशयों पर ठेका प्रथा बंद करने की मांग

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रायपुर 31 मई । छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य में अनुसूचित जनजाति और पारंपरिक वन निवासी परिवारों के अधिकारों के हनन पर गहरी चिंता जताई है। आदिवासियों को उनका हक दिलाने के लिए डॉ. महंत ने देश की राष्ट्रपति को एक अर्धशासकीय पत्र (पत्र क्र. 341/ने.प्र./26) लिखकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

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18 वर्षों से कानून का उल्लंघन, मूल निवासी बने मजदूर

डॉ. महंत ने राष्ट्रपति को सौंपे पत्र में बताया कि ‘वन अधिकार अधिनियम, 2006’ दिसंबर 2007 से पूरे देश में लागू है। इस कानून की धारा 3(1)(घ) के तहत वन भूमि के जलक्षेत्रों में मछली पालन और अन्य उत्पादों पर स्थानीय पात्र लोगों को सामुदायिक अधिकार मिलना चाहिए।

बड़ी चिंता: छत्तीसगढ़ में पिछले 18 वर्षों से इस महत्वपूर्ण प्रावधान को लागू नहीं किया गया है, जिससे स्थानीय निवासी अपने ही जलक्षेत्रों से बेदखल हो रहे हैं।

वर्तमान मछली नीति से आदिवासियों का नुकसान

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार की वर्तमान नीतियों पर सवाल उठाते हुए कुछ प्रमुख आंकड़े और तथ्य सामने रखे हैं:

  • विशाल जलक्षेत्र: छत्तीसगढ़ की वन भूमि पर लगभग 1,58,000 हेक्टेयर का बड़ा जलक्षेत्र मौजूद है।

  • रोजी-रोटी पर संकट: इन जलक्षेत्रों से 50,000 से अधिक आदिवासी और वन निवासी परिवार अपनी जीविका चलाते हैं।

  • ठेकेदारों का कब्जा: नियमों के विपरीत जाकर 1000 हेक्टेयर से बड़े जलाशयों को टेंडर निकालकर बाहरी ठेकेदारों को सौंपा जा रहा है।

  • मजदूरी को मजबूर: जिन जलाशयों पर स्थानीय आदिवासियों का हक होना चाहिए, वहां वे आज बाहरी ठेकेदारों के अधीन महज मजदूर बनकर रह गए हैं।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री को निर्देश देने की मांग

डॉ. चरणदास महंत ने राष्ट्रपति से मांग की है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के आर्थिक और कानूनी हितों की रक्षा के लिए वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(घ) को तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाए। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

डॉ. महंत ने उम्मीद जताई है कि देश के सर्वोच्च कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्य सचिव इस विषय की गंभीरता को समझेंगे और हजारों आदिवासी परिवारों को उनका वास्तविक हक दिलाने के लिए त्वरित व उचित कदम उठाएंगे।

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