अब यह कल्ट क्लासिक फिल्म मोहरा अपनी मूल रिलीज के 32 साल बाद एक बार फिर 6 नवंबर 2026 को नए और रीमास्टर्ड (Remastered) अवतार में सिनेमाघरों में वापसी करने जा रही है।
Mohra Re Release : 90 के दशक की बात ही कुछ अलग थी—जब फिल्में सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सिनेमाघरों में किसी त्योहार की तरह मनाई जाती थीं। राजीव राय के निर्देशन में बनी 1994 की आइकॉनिक एक्शन-थ्रिलर ‘मोहरा’ आज भी दर्शकों के जेहन में उतनी ही ताजा है। अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और रवीना टंडन जैसे दिग्गज कलाकारों की इस फिल्म ने उस दौर में बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था।

अब यह कल्ट क्लासिक फिल्म अपनी मूल रिलीज के 32 साल बाद एक बार फिर 6 नवंबर 2026 को नए और रीमास्टर्ड (Remastered) अवतार में सिनेमाघरों में वापसी करने जा रही है।
महज 4 करोड़ के बजट से करोड़ों की कमाई: असली मास्टरमाइंड कौन?
फिल्म में दमदार एक्शन हीरो और सुपर-हिट गाने (जैसे ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’) तो थे ही, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महज ₹4 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने का असली श्रेय किसे जाता है?
फिल्म की रिकॉर्ड-तोड़ कमाई के पीछे मुख्य वजह कोई पारंपरिक एक्शन हीरो नहीं, बल्कि एक ऐसा शातिर विलेन था, जो दुनिया के सामने खुद को लाचार, गरीब और दृष्टिहीन समाजसेवक दिखाता था। जी हां, हम बात कर रहे हैं दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की, जिनके द्वारा निभाए गए ‘मिस्टर जिंदल’ के किरदार ने इस फिल्म को भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर कर दिया।
भारतीय सिनेमा का सबसे अलग और खौफनाक विलेन
90 के दशक की फिल्मों में विलेन आमतौर पर भारी-भरकम, आक्रामक और खूंखार लुक वाले होते थे (जैसे गब्बर सिंह या मोगैम्बो)। लेकिन ‘मोहरा’ के मेकर्स ने एक ऐसा दांव खेला, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
नसीरुद्दीन शाह ने फिल्म में एक ऐसे मीडिया टाइकून ‘मिस्टर जिंदल’ की भूमिका निभाई, जो शांत, सौम्य और दृष्टिहीन था। दर्शकों के लिए यह सोचना भी नामुमकिन था कि आंखों से न देख सकने वाला व्यक्ति शहर का सबसे खतरनाक क्रिमिनल मास्टरमाइंड हो सकता है। उनकी इसी अप्रत्याशित और शानदार एक्टिंग ने सिनेमाघरों में दर्शकों को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया था।
कैसे बुना गया था धोखाधड़ी का ताना-बाना?
फिल्म में मिस्टर जिंदल अपने अंधेपन और लाचारी का ऐसा जाल बुनता है कि जेल में बंद विशाल अग्निहोत्री (सुनील शेट्टी) पूरी तरह उसके झांसे में आ जाता है। अपनी पत्नी और बहन की हत्या का बदला लेने के लिए बेताब विशाल को जिंदल ‘समाज सुधार’ के नाम पर अपने व्यावसायिक दुश्मनों को रास्ते से हटाने के लिए इस्तेमाल करता है। विशाल केवल उसका एक ‘मोहरा’ बनकर रह जाता है।
जब निडर पुलिस इंस्पेक्टर अमर सक्सेना (अक्षय कुमार) मामले की गहराई से जांच करते हैं, तब जाकर इस खौफनाक साजिश की परतें खुलती हैं। फिल्म के क्लाइमैक्स से ठीक पहले जब यह खुलासा होता है कि असली हत्यारा और मास्टरमाइंड वही अंधा समाजसेवक जिंदल है, तो दर्शकों के होश उड़ जाते हैं।
बॉक्स ऑफिस पर ‘मोहरा’ का ऐतिहासिक प्रदर्शन
1 जुलाई 1994 को रिलीज हुई इस फिल्म का खुमार पूरे देश पर छा गया था। नसीरुद्दीन शाह का आइकॉनिक डायलॉग—“एक चीज मांगो, तो सौ चीज देता हूं मैं”—आज भी सिनेमा प्रेमियों की जुबान पर छाया हुआ है।
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बजट: ~ ₹4 करोड़
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वर्ल्डवाइड कमाई: ~ ₹23 करोड़
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स्थान: 1994 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म
गुलशन राय द्वारा निर्मित इस फिल्म की सफलता में इसके गजब सस्पेंस, थ्रिलर प्लॉट और नसीरुद्दीन शाह के खलनायक वाले किरदार की सबसे बड़ी भूमिका रही।




