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मरवाही गोबर घोटाला: तत्कालीन रेंजर खैरवार निलंबित, SDO के जाली दस्तखत कर तत्कालीन DFO ने दी थी 14.77 लाख के भुगतान को मंजूरी

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मरवाही 28 मई। मरवाही वनमंडल के बहुचर्चित गोबर खरीदी घोटाले में प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच रिपोर्ट के आधार पर नवा रायपुर स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने मरवाही वन परिक्षेत्र के तत्कालीन रेंजर रमेश कुमार खैरवार को सस्पेंड कर दिया है। निलंबन की अवधि में उन्हें बिलासपुर स्थित सीसीएफ (CCF) कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

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इस मामले में कैंपा फंड शाखा के प्रभारी सहायक ग्रेड-दो भूपेंद्र कुमार साहू को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

📑 क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद वर्ष 2022 में मिश्रित प्रजाति पौधारोपण कार्य के नाम पर गोबर खाद खरीदी से जुड़ा है। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// जांच में सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों और जाली बिल-वाउचर के जरिए 14 लाख 77 हजार 600 रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता और फर्जी भुगतान किया गया था। यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में भी गूंज चुका है।

🔍 जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

बिलासपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार पांडेय द्वारा की गई जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं:

  • खाली वाउचर पर दस्तखत: खुरपा (छुआबहरा बीट) के वन प्रबंधन समिति सचिव व फॉरेस्टर श्रीकांत परिहार ने बयान में बताया कि उन्हें सस्पेंड करने की धमकी देकर DFO कार्यालय बुलाया गया और खाली वाउचर पर हस्ताक्षर कराए गए।

  • जाली हस्ताक्षर: फाइल को आगे बढ़ाने के लिए तत्कालीन एसडीओ (SDO) के जाली हस्ताक्षर किए गए और उन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की स्वीकृति दी गई।

  • कैश वापस मंगाया गया: 21 अक्टूबर 2024 को HDFC बैंक के माध्यम से कथित सप्लायरों के खातों में 14.77 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। भुगतान होते ही रेंजर ने फॉरेस्टर के जरिए खातों से नकदी (कैश) निकलवाकर अपने पास रख ली।

  • ‘ऊपर तक पहुंचाना है पैसा’: आरोप है कि रेंजर ने यह रकम यह कहकर मंगवाई थी कि इसे तत्कालीन DFO के माध्यम से ‘ऊपर’ तक पहुंचाना है। इस लेन-देन से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

❓ तत्कालीन DFO की भूमिका पर सवाल, FIR की मांग

इस पूरे घोटाले में सबसे ज्यादा सवाल तत्कालीन डीएफओ (DFO) रौनक गोयल की भूमिका पर उठ रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने ही इन फर्जी फाइलों को सत्यापित कर भुगतान को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद, अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी है।

जनता की मांग: स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ वित्तीय हेरफेर नहीं, बल्कि एक राजपत्रित अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर इस्तेमाल करने का गंभीर आपराधिक मामला है। इसलिए तत्कालीन DFO रौनक गोयल, रेंजर रमेश खैरवार और कैंपा प्रभारी भूपेंद्र साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

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