बेंगलुरु 28 मई : कर्नाटक की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। राज्य में पिछले कई दिनों से चल रही सियासी हलचल पर आखिरकार विराम लग गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हाईकमान के आदेश का पालन करते हुए उन्होंने यह कदम उठाया। अब राज्य की कमान ‘संकटमोचक’ कहे जाने वाले डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के हाथों में सौंपी जा रही है।
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सिर्फ 5 मिनट में राजभवन का ‘क्विक एग्जिट’
यह पूरा सियासी ड्रामा दोपहर 3 बजे के करीब बेहद तेजी से बदला:
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दोपहर 3:00 बजे: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार एक साथ राजभवन पहुंचे।
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दोपहर 3:05 बजे: सिर्फ 5 मिनट के भीतर दोनों नेता औपचारिकताएं पूरी कर राजभवन से बाहर निकल गए।
इस्तीफा किसे सौंपा? चूंकि राज्यपाल थावरचंद गहलोत पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर हैं, इसलिए नियमानुसार सिद्धारमैया ने अपना लिखित इस्तीफा राज्यपाल के सेक्रेटरी को सौंपा। जब तक राज्यपाल इस इस्तीफे को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं कर लेते, तब तक सिद्धारमैया ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।
‘हाईकमान का आदेश सिर माथे पर’: सिद्धारमैया
इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सिद्धारमैया ने बेहद सधे हुए शब्दों में कहा:
“मैंने पहले ही साफ कर दिया था कि जब भी आलाकमान का आदेश होगा, मैं पद छोड़ दूंगा। कल मुझे हाईकमान से निर्देश मिला, और आज मैंने इस्तीफा दे दिया। अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री को मौका मिलना चाहिए और हम सब मिलकर काम करेंगे।”
ब्रेकफास्ट मीटिंग से तय हुआ ‘नया बॉस’
इस बड़े सियासी उलटफेर की स्क्रिप्ट सुबह ही लिखी जा चुकी थी। सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में अपने सरकारी आवास पर मंत्रियों के लिए एक ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ बुलाई थी। इसी नाश्ते की मेज पर सिद्धारमैया ने अपने मंत्रियों को इस्तीफे के फैसले की जानकारी दी।
कैबिनेट मंत्री एचके पाटिल ने बैठक के बाद पुष्टि की कि मीटिंग में सर्वसम्मति से डीके शिवकुमार के नाम पर मुहर लगा दी गई है। वही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
भावुक पल: पैर छुए, फिर लगाया गले
इस पूरी सियासी उठापटक के बीच बेंगलुरु से एक बेहद भावुक तस्वीर भी सामने आई। जैसे ही बैठक में डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बनी, उन्होंने बड़े भाई की तरह सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद सिद्धारमैया ने भी गर्मजोशी से डीके शिवकुमार को गले लगा लिया, जो यह संदेश देने के लिए काफी था कि कर्नाटक कांग्रेस में ‘ऑल इज वेल’ है।
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