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‘हम मिलें न मिलें, हम आपसे बहुत प्यार करते हैं…’ : जब अस्वस्थता के बीच उमड़ा प्रेमानंद महाराज का वात्सल्य, भक्तों की थमी सांसें और रो पड़े दिल ‘स्वच्छ भारत’ का अनोखा ‘बिजनेस मॉडल’: ससुर-जेठ ने बेच डाला बहू का सरकारी शौचालय, अब खुले में जाने की दे रहे धमकी! सावधान! गर्मी में कहीं नकली ORS घोल तो नहीं पी रहे आप? इस आसान तरीके से करें असली-नकली की पहचान, वरना किडनी-लीवर को होगा भारी नुकसान : 🚨 पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में फिर भारी आग:10 दिन में चौथी बार बढ़े दाम दिल्ली के छत्तीसगढ़ सदन में बड़ी बैठक: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिला सर्व आदिवासी समाज का प्रतिनिधिमंडल, केदार कश्यप रहे मौजूद एवरेस्ट विजेता अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य को लेकर राज्य सरकार गंभीर; मुख्यमंत्री साय बोले— ‘बिटिया के बेहतर इलाज के लिए सरकार पूरी तरह मुस्तैद’
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‘हम मिलें न मिलें, हम आपसे बहुत प्यार करते हैं…’ : जब अस्वस्थता के बीच उमड़ा प्रेमानंद महाराज का वात्सल्य, भक्तों की थमी सांसें और रो पड़े दिल

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Premanand Maharaj Health मथुरा-वृंदवन 25 मई । ब्रज की पावन माटी, जहां कण-कण में राधा-नाम गूंजता है, वहां से एक ऐसी खबर आई है जिसने लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं के दिलों को झकझोर कर रख दिया है। अपनी सहज मुस्कान, तीखे मगर जीवन बदलने वाले वचनों और अटूट राधा-भक्ति के लिए दुनिया भर में पूजनीय संत पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज इन दिनों अस्वस्थ हैं। शारीरिक अस्वस्थता के चलते पिछले 9 दिनों से उनकी वह सुप्रसिद्ध ‘पदयात्रा’ रुकी हुई है, जिसके दर्शनों के लिए भक्त आधी रात से ही वृंदावन की गलियों में पलकें बिछाए इंतजार करते थे।

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इस बीच, अपने भक्तों की व्याकुलता और उनके आंसुओं को भांपते हुए महाराज श्री ने एक ऐसा भावुक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसे सुनकर हर आंख नम है और हर दिल गुरु-प्रेम के समंदर में डूब गया है।

1 मिनट 19 सेकंड का वो संदेश, जिसने हिला दी भक्तों की दुनिया

महाराज जी का शरीर भले ही अस्वस्थ हो, लेकिन अपने शिष्यों और भक्तों के प्रति उनका प्रेम हमेशा की तरह असीम है। करीब 1 मिनट 19 सेकेंड के इस वीडियो संदेश में गुरुदेव ने अपने आंसुओं को रोकते भक्तों को ढांढस बंधाते हुए जो कहा, वो केवल शब्द नहीं, बल्कि एक अमर आध्यात्मिक दिलासा है।

महाराज श्री ने अत्यंत करुणा भरे स्वर में कहा:

“बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। अंतिम बात यही कि चिंता नहीं करनी। न ये चिंता करनी है कि कैसे हमारा उत्थान होगा। बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे।”

इन शब्दों ने सोशल मीडिया से लेकर वृंदावन के कुंजों तक, हर जगह भक्तों को भावुक कर दिया है। यह एक गुरु का अपने शिष्यों को दिया गया वह अभयदान है, जो यह साबित करता है कि गुरु और शिष्य का संबंध हाड़-मांस के शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा का होता है।

शरीर तो नश्वर है, ‘श्रीजी’ की भक्ति ही शाश्वत है…

तबीयत बिगड़ने के कारण भले ही महाराज जी साक्षात दर्शन और नियमित पदयात्रा नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन उनकी चेतना अपने हर एक अनुयायी के साथ जुड़ी है। इस संदेश में उन्होंने अध्यात्म का सबसे बड़ा सूत्र भी अपने भक्तों को सौंपा।

उन्होंने विशेष अपील करते हुए कहा कि “व्यक्ति को किसी संत या नश्वर शरीर से अधिक, अविनाशी ईश्वर की भक्ति पर ध्यान देना चाहिए।” उन्होंने प्रेमपूर्वक डांटते और समझाते हुए कहा कि चिंता को छोड़ो और अपना पूरा मन भजन, साधना और दीन-दुखियों की सेवा में लगाओ। यही उनकी सच्ची गुरुदक्षिणा होगी।

भक्तों की थमी सांसें, सोशल मीडिया पर दुआओं का सैलाब

जैसे ही यह वीडियो सामने आया, श्रद्धालुओं का मानो कलेजा मुंह को आ गया। इंटरनेट पर हर कोई महाराज जी के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है। भक्तों का कहना है कि यह संदेश गुरु और शिष्य के बीच के उस अटूट, निश्छल और अलौकिक प्रेम का प्रतीक है जो मृत्यु और बीमारी के भय से बहुत ऊपर है।

वृंदावन की कुंज गलियों से लेकर देश-विदेश के कोनों तक, इस समय केवल एक ही प्रार्थना गूंज रही है— “हे लाडली जी! हमारे महाराज जी को शीघ्र स्वस्थ कर दो।”

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