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छत्तीसगढ़ में ‘वर्क फ्रॉम होम’ की गूंज: सरकारी कर्मचारियों ने ईंधन संकट के डर से की बड़ी मांग

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रायपुर | 15 मई 2026

छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में आज उस वक्त हलचल तेज हो गई जब प्रदेश के सबसे बड़े कर्मचारी संगठन, छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन, ने राज्य सरकार के सामने एक अनोखी और दूरगामी मांग रख दी। फेडरेशन ने वैश्विक परिस्थितियों और भविष्य में होने वाले संभावित ईंधन संकट (Fuel Crisis) को देखते हुए सरकारी कार्यालयों में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) कार्यप्रणाली लागू करने का आग्रह किया है।


वैश्विक संकट और ईंधन संरक्षण का तर्क

फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वर्तमान में विश्व स्तर पर युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। इन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल और उपलब्धता में कमी आने की गंभीर आशंका है। संगठन का मानना है कि ईंधन संरक्षण और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग अब समय की मांग बन चुका है।

ई-ऑफिस से राह हुई आसान

संगठन ने तर्क दिया है कि छत्तीसगढ़ शासन पहले ही ई-ऑफिस (e-Office System) को सफलतापूर्वक अपना चुका है। चूंकि अधिकांश प्रशासनिक फाइलें अब डिजिटल माध्यम से मूव होती हैं, इसलिए “वर्क फ्रॉम होम” को चरणबद्ध तरीके से लागू करना पूरी तरह से व्यावहारिक है। डिजिटल युग में अधिकांश कार्यालयीन कार्य ऑनलाइन संपादित किए जा सकते हैं, जिससे न केवल ईंधन बचेगा बल्कि सड़कों पर यातायात का दबाव भी कम होगा।


नवा रायपुर के कर्मचारियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा केंद्र नवा रायपुर है। वर्तमान में रायपुर शहर से नवा रायपुर स्थित मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों की दूरी तय करने में कर्मचारियों का काफी समय और निजी/शासकीय संसाधन खर्च होते हैं। वर्क फ्रॉम होम लागू होने से इन संसाधनों की सीधी बचत होगी और कर्मचारियों की कार्यक्षमता में भी सुधार होगा।

संगठन के सुझाव

फेडरेशन ने इसे तुरंत पूर्ण रूप से लागू करने के बजाय कुछ व्यावहारिक विकल्प भी दिए हैं:

  • इसे आवश्यकतानुसार या सप्ताह में कुछ निश्चित दिनों के लिए शुरू किया जाए।

  • जरूरी सेवाओं को छोड़कर अन्य विभागों में रोटेशन के आधार पर लागू हो।

  • तकनीकी रूप से सक्षम विभागों को प्राथमिकता दी जाए।


निष्कर्ष: अब फैसले का इंतजार

छत्तीसगढ़ सरकार के पाले में अब गेंद है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो छत्तीसगढ़ देश के उन अग्रणी राज्यों में शुमार हो जाएगा जो आधुनिक कार्यप्रणाली और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठा रहे हैं। फिलहाल, कर्मचारियों की निगाहें मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं।

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