चेन्नई 11 मई : तमिलनाडु की सत्ता के सिंहासन पर रविवार को ‘थलपति’ विजय की ताजपोशी तो हुई, लेकिन यह समारोह केवल अपनी भव्यता के लिए नहीं, बल्कि एक अप्रत्याशित घटना के लिए भी याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय एक पल ऐसा आया जब पूरे स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया—जब राज्यपाल को बीच में ही विजय को रोकना पड़ा।
क्या था पूरा मामला?
रविवार, 10 मई 2026 को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में ‘तमिलगा वेट्री कज़गम’ (TVK) के मुखिया विजय जैसे ही शपथ लेने मंच पर आए, समर्थकों का शोर आसमान छू रहा था। जोश और भावनाओं के इसी सैलाब में बहकर विजय ने शपथ की पंक्तियाँ पढ़ते समय संवैधानिक मर्यादा से हटकर अपनी ओर से कुछ अतिरिक्त शब्द और राजनीतिक वादे जोड़ने शुरू कर दिए।
जब राज्यपाल ने थामी ‘प्रोटोकॉल’ की लगाम
जैसे ही विजय ने लिखित मसौदे से बाहर कदम रखा, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने तुरंत हस्तक्षेप किया। राज्यपाल ने विजय को बीच में टोकते हुए बेहद सख्त लेकिन शालीन लहजे में समझाया:
“विजय जी, शपथ एक गंभीर संवैधानिक अनुबंध है। आपको केवल वही शब्द दोहराने हैं जो संविधान द्वारा निर्धारित इस पत्र में लिखे गए हैं। भावनाओं का स्थान भाषण में है, शपथ में नहीं।”
झुके थलपति, जीता सबका दिल
एक पल के लिए लगा कि माहौल तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन सुपरस्टार विजय ने अपनी परिपक्वता का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत अपना सिर झुकाया, राज्यपाल की बात का सम्मान किया और मुस्कुराते हुए फिर से वही शब्द दोहराए जो संविधान की मर्यादा के अनुरूप थे।
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय
यह वीडियो अब इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है। लोग इसे “कानून की जीत” और “विजय की सादगी” का नाम दे रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि राज्यपाल ने विजय को पहले ही दिन यह अहसास करा दिया कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद ‘भावनाएं’ नहीं, बल्कि ‘संविधान’ सबसे ऊपर होता है।
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