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“सुशासन की ‘दंडवत’ तस्वीर: पक्के घर की आस में बेबस ग्रामीण ने CEO के सामने टेके घुटने”, प्रशासन ने दी सफाई

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गरियाबाद 10 मई। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आयोजित ‘समाधान शिविर’ के दौरान एक विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) के बुजुर्ग दंपति द्वारा जिला पंचायत CEO के सामने दंडवत होकर आवास की गुहार लगाने का मामला चर्चा में है। //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// इस भावुक दृश्य के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि परिवार के लंबे समय तक राज्य से बाहर रहने के कारण उनका नाम सूची में शामिल नहीं हो सका था।


क्यों नहीं मिला अब तक आवास?

जिला पंचायत CEO प्रखर चंद्राकर ने मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि संबंधित हितग्राही परिवार विशेष पिछड़ी जनजाति से ताल्लुक रखता है, लेकिन वे लंबे समय से ओडिशा में निवास कर रहे थे।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//

  • सर्वे से वंचित: परिवार के छत्तीसगढ़ में न होने के कारण वर्ष 2011 और 2018 की आवास सर्वे सूची में उनका नाम शामिल नहीं हो पाया।

  • 2024 का सर्वे: वर्ष 2024 में शासन द्वारा कराए गए नवीन सर्वेक्षण के दौरान भी यह परिवार गांव में मौजूद नहीं था।

  • हालिया वापसी: यह परिवार कुछ ही दिन पहले ओडिशा से वापस छत्तीसगढ़ लौटा है।

शिविर में ही मिला ‘ऑन द स्पॉट’ समाधान

बुजुर्ग दंपति की गुहार पर संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रशासन ने शिविर में ही उनके आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाए:

  1. राशन कार्ड व जॉब कार्ड: पात्रता के अनुसार तत्काल राशन कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड बनाकर सौंपा गया।

  2. आयुष्मान कार्ड: आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी मौके पर ही शुरू कर दी गई।

  3. आवास की स्वीकृति: पीएम जनमन योजना (PM Janman) के तहत परिवार का सर्वे पूर्ण कर लिया गया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि केंद्र सरकार से अनुमति मिलते ही जल्द आवास स्वीकृत कर दिया जाएगा।

प्रशासन का पक्ष

CEO प्रखर चंद्राकर ने कहा कि जिले में विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए बार-बार सर्वे कराकर हितग्राहियों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जो पात्र परिवार पूर्व में छूट गए थे, //आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज//उनकी सूची तैयार कर ली गई है और शासन के निर्देशानुसार उन्हें सभी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिया जा रहा है।


प्रमुख बिंदु:

  • बुजुर्ग दंपति ने पीएम आवास के लिए लगाई थी गुहार।

  • ओडिशा में रहने के कारण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था नाम।

  • प्रशासन ने शिविर में ही राशन कार्ड और जॉब कार्ड किया जारी।

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