मुंबई: बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ अब एक नई बहस का केंद्र बन गई है। अभिनेता और निर्देशक दीपक तिजोरी ने फिल्म की सेंसरशिप प्रक्रिया और सिनेमाघरों बनाम ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म के अलग-अलग नियमों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

सेंसरशिप के ‘आधे-अधूरे’ नियमों पर हैरानी

दीपक तिजोरी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए सेंसर बोर्ड (CBFC) के काम करने के तरीके पर आश्चर्य जताया। उनका मुख्य सवाल गालियों को ‘आधा म्यूट’ करने को लेकर था। उन्होंने पूछा कि जब किसी शब्द को आधा सुनाई देने दिया जाता है और आधा म्यूट किया जाता है, तो इसके पीछे क्या तर्क है? तिजोरी के अनुसार, कुछ शब्दों को पूरी तरह हटाना और कुछ को अधूरा छोड़ देना समझ से परे है।
‘ए’ सर्टिफिकेट तो फिर पाबंदी किससे?
तिजोरी ने तर्क दिया कि जब फिल्म को पहले ही ‘ए’ (Adults Only) सर्टिफिकेट मिल चुका है, जिसका मतलब है कि इसे केवल वयस्क ही देख सकते हैं, तो फिर शब्दों को काटने या म्यूट करने का क्या औचित्य है? उन्होंने सवाल किया, “जब फिल्म वयस्कों के लिए है, तो हम किसे और क्या बचाने की कोशिश कर रहे हैं?”
सिनेमाघर बनाम ओटीटी: दोहरे मापदंड
बहस का सबसे बड़ा मुद्दा सिनेमाघर और ओटीटी के बीच का अंतर रहा। तिजोरी ने लिखा कि जिस फिल्म को थिएटर में म्यूट के साथ दिखाया जाता है, वही फिल्म कुछ समय बाद ओटीटी पर बिना किसी कट या म्यूट के ओरिजिनल वर्जन में रिलीज हो जाती है। ऐसे में बच्चे भी उसे घर पर परिवार के साथ देख लेते हैं। उन्होंने पूछा कि अगर वही चीज बाद में पूरी आवाज में सुनी जानी है, तो थिएटर में सेंसरशिप की समझदारी क्या है?
‘धुरंधर 2’ पर चली थी सेंसर की कैंची
रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘धुरंधर 2’ को रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड के 21 कट्स और बदलावों से गुजरना पड़ा था। इसमें शामिल थे:
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हिंसक दृश्य: सिर काटने, आंख निकालने और घातक हमलों वाले दृश्यों को कम किया गया।
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तथ्यात्मक सुधार: नोटबंदी की तारीख ठीक करना और ‘लाहौर’ की जगह ‘दिल्ली’ लिखना जैसे बदलाव।
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लंबाई: इन कटौतियों के कारण भारत में रिलीज वर्जन विदेशी वर्जन से लगभग 6 मिनट छोटा है। फिल्म की कुल लंबाई 3 घंटे 49 मिनट है।
दमदार स्टार कास्ट
फिल्म में रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल, आर माधवन और संजय दत्त मुख्य भूमिकाओं में हैं, जो पहले पार्ट की सफलता को आगे बढ़ा रहे हैं।
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