ईरान इजरायल युद्व : मिडिल ईस्ट में गहराते सुरक्षा संकट के बीच एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जैसे-जैसे इज़राइल और ईरान के बीच सीधी जंग की संभावना बढ़ रही है, खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रहने वाले अरबपति और हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) ने सुरक्षित स्थानों पर शरण लेना शुरू कर दिया है।
1. $350,000 की ‘सुरक्षित’ उड़ान
निजी जेट फर्मों की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के डर से लोग कमर्शियल उड़ानों के बजाय प्राइवेट जेट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
-
लागत: एक वन-वे फ्लाइट के लिए लोग $350,000 (लगभग ₹3.2 करोड़) तक खर्च कर रहे हैं।
-
गंतव्य: अधिकांश रईस लोग दुबई, रियाद और अन्य खाड़ी शहरों से निकलकर लंदन, स्विट्जरलैंड, मोनाको और साइप्रस जैसे सुरक्षित देशों का रुख कर रहे हैं।
2. मांग में भारी उछाल
प्राइवेट चार्टर कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में बुकिंग में 400% तक की वृद्धि देखी गई है। स्थिति यह है कि अब विमानों की कमी पड़ रही है, जिसके कारण किराए आसमान छू रहे हैं। लोग केवल खुद ही नहीं, बल्कि अपने पूरे स्टाफ और पालतू जानवरों के साथ निजी विमानों को बुक कर रहे हैं।
3. डर की मुख्य वजह
-
एयरस्पेस बंदी: ईरान द्वारा इज़राइल पर दागी गई मिसाइलों के बाद जॉर्डन, लेबनान और इराक जैसे देशों ने अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया था। रईसों को डर है कि अगर पूर्ण युद्ध छिड़ा, तो वे क्षेत्र में फंस सकते हैं।
-
मिसाइल और ड्रोन हमले: हाल ही में जिस तरह से ड्रोन और मिसाइलों ने सीमाओं को पार किया है, उससे सुरक्षा की गारंटी खत्म हो गई है।
4. ‘गोल्डन वीजा’ धारकों का पलायन
हैरानी की बात यह है कि जो लोग सालों से मिडल ईस्ट को अपना घर मान रहे थे, वे भी अब “बैकअप प्लान” पर काम कर रहे हैं। रईस परिवारों ने यूरोप में अपनी संपत्तियों को तैयार कर लिया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वहां शिफ्ट हुआ जा सके।
निष्कर्ष
जहाँ आम जनता युद्ध के साये में अनिश्चितता का सामना कर रही है, वहीं संपन्न वर्ग के लिए उनकी संपत्ति इस संकट से बाहर निकलने का पासपोर्ट बन गई है। यह स्थिति दिखाती है कि युद्ध की आशंका न केवल कूटनीतिक बल्कि आर्थिक और सामाजिक ढांचे को भी हिला देती है।
।।।








