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शादी का दबाव बना रही प्रेमिका को उतारा मौत के घाट, लाश नाली में दफन करने वाले ‘कातिल प्रेमी’ को उम्रकैद

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Crime Update 08 जनवरी, 2026:  कोरबा की एक अदालत ने प्रेम और विश्वास के कत्ल के तीन साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपनी प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या करने और सबूत मिटाने के इरादे से लाश को नाली में दफनाने वाले आरोपी गोपाल उर्फ रामगोपाल खड़िया (29 वर्ष) को प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

शादी की जिद बनी मौत का कारण

विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार सोनवानी के अनुसार, ग्राम ढेलवाडीह की रहने वाली अंजू उर्फ सोनी यादव आरोपी गोपाल के साथ पति-पत्नी की तरह रह रही थी। सोनी सामाजिक रीति-रिवाज से विवाह करना चाहती थी और लगातार शादी का दबाव बना रही थी। गोपाल इस रिश्ते को नाम देने के लिए तैयार नहीं था। इसी विवाद के चलते जुलाई 2022 में गोपाल ने सोनी की गला घोंटकर हत्या कर दी और शव को पास ही स्थित सागौन बाड़ी की एक नाली में दफना दिया।

6 महीने तक मां को गुमराह करता रहा कातिल

बेटी के लापता होने के बाद उसकी मां और बहन लगातार गोपाल से पूछताछ करती रहीं, लेकिन वह हर बार उन्हें गुमराह करता रहा। लगभग छह महीने बीत जाने के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तब मां ने 1 मार्च 2023 को मानिकपुर चौकी (कोतवाली) में बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जब संदेही गोपाल को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तब उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

DNA जांच से हुई पहचान, कोर्ट में खुली पोल

पुलिस ने कार्यपालक दंडाधिकारी की मौजूदगी में नाली से सोनी के कंकाल को बरामद किया। चूंकि शव बुरी तरह गल चुका था, इसलिए पहचान सुनिश्चित करने हेतु अंगों का डीएनए टेस्ट कराया गया। सोनी की मां और बरामद अवशेषों का डीएनए मैच होने के बाद हत्या की पुष्टि हुई।

न्यायालय का फैसला

न्यायाधीश गरिमा शर्मा की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सोनी की मां और बहन की गवाही को अत्यंत महत्वपूर्ण माना। गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने गोपाल खड़िया को हत्या (धारा 302) और साक्ष्य छिपाने (धारा 201) का दोषी पाया। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए आर्थिक दंड भी लगाया है।

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