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रायगढ़: ग्रामीणों की सामूहिक शक्ति के आगे झुका प्रबंधन, गारे पेलमा सेक्टर-1 की जनसुनवाई निरस्त

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Raigarh: Management Bows to Collective People Power; Gare Pelma Sector-1 Public Hearing Cancelled

रायगढ़ | तमनार छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित तमनार क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपनी एकजुटता से एक बड़ी जीत हासिल की है। भारी विरोध और 22 दिनों तक चले कड़े आंदोलन के बाद JPL (जिंदल पावर लिमिटेड) ने गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित जनसुनवाई के आवेदन को वापस ले लिया है। जिला प्रशासन अब इस जनसुनवाई को आधिकारिक रूप से निरस्त करने की प्रक्रिया में जुट गया है।

बिना नेता के लड़ी गई अस्तित्व की लड़ाई

इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वरूप रहा। 14 गांवों के करीब 4 हजार ग्रामीणों ने बिना किसी औपचारिक नेता के इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया। आंदोलन में शामिल हर ग्रामीण की आवाज बराबर थी और सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए। नेतृत्व का कोई एक चेहरा न होने के कारण प्रशासन भी लंबे समय तक पसोपेश में रहा कि आखिर समझौता वार्ता के लिए किसे आमंत्रित किया जाए।

विवाद की जड़: 3100 हेक्टेयर जमीन और फर्जी ईआईए रिपोर्ट

कोल ब्लॉक के लिए क्षेत्र के 14 गांवों (धौराभांठा, लिबरा, झिकाबहाल, बागबाड़ी, बुड़िया, समकेरा, झरना, खुरूसलेंगा, लमडांड, बिजना, टांगरघाट, आमगांव, रावनगुड़ार और तिलाईपारा) की लगभग 3100 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी थी। कंपनी ने प्रति एकड़ 62 लाख रुपये मुआवजे का प्रस्ताव दिया था, लेकिन ग्रामीणों ने इसे ठुकरा दिया।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि:

  • कंपनी की EIA (पर्यावरण प्रभाव आकलन) रिपोर्ट पूरी तरह फर्जी आंकड़ों पर आधारित है।

  • प्रभावित क्षेत्र के 10 किमी दायरे में आने वाले ओडिशा के गांवों को रिपोर्ट की जानकारी नहीं दी गई।

  • तमनार ब्लॉक के दो दर्जन से अधिक गांवों में जन अवलोकन की प्रक्रिया केवल कागजों पर फर्जी तरीके से पूरी की गई।

27 दिसंबर की हिंसा और पुलिसिया बर्बरता के आरोप

8 दिसंबर से शुरू हुआ यह आंदोलन 27 दिसंबर को उस समय हिंसक मोड़ ले लिया, जब लिबरा के सीएचपी चौक पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण धरने पर बैठे 40-50 लोगों को जबरन उठाया, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए। इस संघर्ष में जनता के खिलाफ 6 आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।

ग्रामीण राधेश्याम शर्मा ने कहा, “पुलिस ने हमें डराने और दबाव बनाने की पूरी कोशिश की। अब हम उन अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज कराएंगे जिन्होंने निहत्थे ग्रामीणों पर बल प्रयोग किया।”

सियासी सरगर्मी: कांग्रेस ने घेरा प्रशासन को

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने 29 दिसंबर को धरना स्थल का दौरा किया। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि पुलिस ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को जानबूझकर उकसाया। महिलाओं और पुरुषों की जबरन गिरफ्तारी को उन्होंने ‘बर्बरता’ करार दिया और इस पूरी घटना के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।

प्रबंधन का ‘बैकफुट’ और प्रशासन का रुख

लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए 29 दिसंबर को JPL कंपनी ने प्रशासन को पत्र लिखकर जनसुनवाई का आवेदन वापस लेने की मांग की। घरघोड़ा एसडीएम दुर्गा प्रसाद ने पुष्टि की है कि जनसुनवाई निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

प्रशासन का पक्ष: प्रक्रिया शुरू

घरघोड़ा एसडीएम दुर्गा प्रसाद ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि कंपनी के आवेदन के बाद अब प्रशासन जनसुनवाई को आधिकारिक तौर पर निरस्त करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहा है। प्रशासन अब इस कोशिश में है कि क्षेत्र में तनाव कम हो और सामान्य स्थिति बहाल हो सके।

भविष्य की चुनौती

भले ही अभी जनसुनवाई निरस्त हो गई है, लेकिन 3100 हेक्टेयर जमीन और 14 गांवों के भविष्य पर अभी भी तलवार लटकी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में दोबारा ‘फर्जी’ तरीके से प्रक्रिया शुरू की गई, तो आंदोलन और भी उग्र होगा।

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