अजमेर | सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भेजी गई चादर शनिवार को दरगाह शरीफ में पेश की गई। देश की एकता और सद्भाव के प्रतीक के रूप में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री का संदेश पढ़ा और चादर चढ़ाने की रस्म पूरी की। यह परंपरा देश की आजादी के बाद से अनवरत चली आ रही है।
नेहरू से मोदी तक: एक अटूट परंपरा
अजमेर दरगाह में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा चादर भेजने की शुरुआत देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इसके बाद इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी समेत सभी प्रधानमंत्रियों ने इस रस्म को निभाया। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 2014 से हर साल नियमित रूप से उर्स के मौके पर अकीदत के फूल और चादर भेज रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा विवाद
इस वर्ष यह परंपरा कानूनी विवादों के साये में रही। ‘हिंदू सेना’ के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर पीएमओ द्वारा चादर चढ़ाने पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि:
अजमेर दरगाह के स्थान पर प्राचीन ‘संकट मोचन महादेव मंदिर’ होने का दावा अदालत में लंबित है।
मुकदमा लंबित रहते हुए प्रधानमंत्री द्वारा चादर चढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
यह कृत्य संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के विपरीत है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल मौखिक सुनवाई की मांग को अस्वीकार कर दिया, जिससे इस वर्ष चादर चढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
ख्वाजा साहब के दरबार में न केवल केंद्र सरकार, बल्कि विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। इस वर्ष राजस्थान के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी की ओर से भी चादर पेश की गई। पूर्व में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी चादर भेजते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान और बांग्लादेश की सरकारों द्वारा भी प्रतिवर्ष उर्स के दौरान चादर भेजने की परंपरा रही है।
सद्भाव का संदेश
तमाम विवादों के बावजूद, दरगाह कमेटी और स्थानीय प्रशासन ने इसे देश की ‘साझी विरासत’ का हिस्सा बताया है। पीएमओ की ओर से आने वाली यह चादर विशेष रूप से तैयार की जाती है, जो शांति और भाईचारे का संदेश देती है।








