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अकेलेपन ने शंकर की जिंदगी छीन ली.. दिल्ली चिड़ियाघर में एकमात्र अफ्रीकी हाथी की तनाव से मौत

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African Elephant  Shankar Died: दिल्ली चिड़ियाघर में बुधवार रात को एकमात्र अफ्रीकी हाथी शंकर की मौत हो गई। शंकर को 1996 में जिम्बाब्वे ने भारत को उपहार में दिया था और 1998 में चिड़ियाघर पहुंचा था। मौत का कारण जानने के लिए जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

मौत के कारण

शंकर की मौत के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन बताया जा रहा है कि चिड़ियाघर प्रशासन की लापरवाही के कारण शंकर को अपनी जान गंवानी पड़ी। शंकर को कुछ समय पहले चिड़ियाघर प्रशासन ने जंजीरों में बांधा हुआ था, जिसकी वजह से उसके पैर में जंजीर घुस गई थी। इसके अलावा, शंकर का अकेलापन भी उसकी मौत का एक कारण माना जा रहा है ।

शंकर 1998 में दिल्ली आया था

बता दें कि शंकर साल 1996 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा को जिम्बाब्वे की ओर से उपहार में दिया गया था, वहां से लंबा सफर तय करके शंकर को 1998 में दिल्ली लाया गया था।

अकेलेपन की समस्या

शंकर को चिड़ियाघर के 13 नंबर बाड़े में अकेले रखा गया था, जबकि अन्य हाथियों को उससे अलग रखा गया था। साल 2012 से ही शंकर को एशियाई हाथियों से अलग कर दिया गया था। उसके साथी बंबई की मौत 2001 में हो गई थी, जिसके कारण शंकर अकेला रह गया था। अकेलेपन की वजह से शंकर का व्यवहार आक्रामक होता जा रहा था , बता दे की आमतौर पर हाथी की उम्र 70 साल होती हैं लेकिन शंकर ने लगभग 33 साल की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया।

न्यायालय का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2022 में दिल्ली चिड़ियाघर को दूसरा साथी हाथी लाने का आदेश दिया था, जिससे शंकर का अकेलापन दूर हो सके। लेकिन चिड़ियाघर प्रशासन ने इसमें लगातार देरी की, जिसके कारण शंकर की जिंदगी छीन गई ।