छत्तीसगढ़ में ‘ड्रोन दीदी’ उड़ाएंगी प्रगति का विमान: CM विष्णुदेव साय ने महिला किसानों के दल को प्रशिक्षण के लिए किया रवाना
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रायपुर 21 जून : छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) शनिवार को सूबे के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र परिसर से ‘ड्रोन दीदी अभियान’ के तहत महिला कृषकों के 5 सदस्यीय दल को हरी झंडी दिखाकर रायपुर के लिए रवाना किया। यह दल रायपुर में ड्रोन पायलट बनने का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करेगा।
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इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) कृषि में तकनीक का समावेश आज की सबसे बड़ी जरूरत है। ‘ड्रोन दीदी अभियान’ सिर्फ एक ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण आत्मनिर्भरता और नारी शक्ति के उदय का एक नया जरिया है।
### कृषि बनेगी अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी
मुख्यमंत्री श्री साय ने ड्रोन तकनीक के फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे फसलों पर खाद और कीटनाशकों का छिड़काव बेहद कम समय और सटीकता से किया जा सकेगा। इससे किसानों के समय, श्रम और पैसे की बचत होगी, साथ ही फसल की गुणवत्ता और पैदावार भी बढ़ेगी। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक व टिकाऊ बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।
### स्वरोजगार और अतिरिक्त आय के खुलेंगे द्वार
इस अभियान के तहत महिला किसानों को ड्रोन उड़ाने, उसके रखरखाव और सुरक्षा मानकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन पायलट के रूप में काम कर सकेंगी। इससे न केवल उनके लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि वे साथी किसानों को भी आधुनिक खेती के लिए प्रेरित कर अतिरिक्त आय कमा सकेंगी।
“महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना ग्रामीण विकास और विकसित कृषि की कल्पना अधूरी है। यह पहल ‘तकनीक से सशक्त महिला, समृद्ध किसान और विकसित कृषि’ के संकल्प को पूरा करेगी।” — श्री विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)
### मुख्य विशेषताएं
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पहल: ‘ड्रोन दीदी अभियान’ के तहत महिला किसानों को ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग।
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शुभारंभ: CM विष्णुदेव साय ने कुनकुरी से 5 सदस्यीय महिला दल को हरी झंडी दिखाई।
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उद्देश्य: महिलाओं को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना और कृषि लागत को कम करना।
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फायदा: कम समय में कीटनाशकों व उर्वरकों का सटीक छिड़काव, ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए साधन।








